निजीकरण की चिंताओं पर इसरो के कर्मचारियों ने चेयरमैन को लिखा पत्र

इसरो चेयरमैन वी नारायणन को नौ कर्मचारी संगठनों ने पत्र लिखा है। इन संगठनों का कहना है कि कर्मचारियों को दिए गए उनके भाषण में प्राइवेटाइज़ेशन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और अन्य चिंताओं से जुड़े खास सवालों का समाधान नहीं हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन के नौ कर्मचारी संगठनों ने एक बार फिर चेयरमैन वी नारायणन को पत्र लिखा है। उन्होंने इन मुद्दों पर चर्चा के लिए जल्द से जल्द मीटिंग करने का भी अनुरोध किया है। अपनी बात को दोहराते हुए इन लोगों का कहना है कि एजेंसी की भविष्य की भूमिका, “प्राइवेटाइज़ेशन का बढ़ता खतरा”, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी पॉलिसी जैसे अहम सवालों का जवाब चेयरमैन ने उनके पिछले पत्र में नहीं दिया था।

नौ संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाली ‘जॉइंट एक्शन काउंसिल’ के 7 अक्टूबर, 2026 के पत्र में कहा गया, “इसरो की भविष्य की तय भूमिका, प्राइवेटाइज़ेशन/मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल कामों के ट्रांसफर की पॉलिसी, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्टाफिंग और भर्ती, और कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े अहम सवालों का अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।”

मीडिया रिपोर्ट में पत्र में चेयरमैन द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए कर्मचारियों को संबोधित किए जाने की बात तो मानी गई, लेकिन कहा गया कि इस कोशिश से काउंसिल के ज़रिए कर्मचारियों द्वारा उठाए गए सवालों और चिंताओं का पर्याप्त समाधान नहीं हुआ। इसी वजह से वे मीटिंग की मांग के लिए दोबारा पत्र लिख रहे हैं।

ख़बरों के अनुसार, इसरो कर्मचारियों का यह अभूतपूर्व विरोध सबसे पहले 4 सितंबर को सामने आया, जब डिपार्टमेंट ऑफ़ स्पेस (DoS) के सेंटर्स में मौजूद नौ कर्मचारी संगठनों ने एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा। यूनियनों ने प्राइवेट सेक्टर की भूमिका पर चिंता जताई और इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइज़ेशन सेंटर (IN-SPACe) के चेयरमैन पवन गोयनका के 21 अगस्त के उस सार्वजनिक बयान पर सवाल उठाए, जिसमें कहा गया था कि इसरो आखिरकार लॉन्च व्हीकल बनाना बंद कर देगा।

बढ़ती बेचैनी को देखते हुए, इसरो चेयरमैन वी नारायणन ने 8 सितंबर को सभी सेंटर्स के कर्मचारियों को एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए संबोधित किया। 30 मिनट के इस भाषण में नारायणन ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाकर उनकी आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की कि एजेंसी का प्राइवेटाइज़ेशन नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसरो की पिछली उपलब्धियों को भी गिनाया और भविष्य के मिशनों की एक महत्वाकांक्षी योजना की रूपरेखा भी बताई।

हालांकि, कर्मचारी संगठनों का मानना ​​था कि इस भाषण से 4 सितंबर के पत्र में उठाए गए पॉलिसी-लेवल के खास सवालों का समाधान नहीं हुआ। एसोसिएशन अब चेयरमैन के साथ “आमने-सामने बातचीत” करना चाहती है ताकि उनकी चिंताओं पर बात हो सके।

4 सितंबर की अपनी चिट्ठी में, कर्मचारी संगठनों ने कहा था कि हालांकि “तय कमर्शियल गतिविधियों में प्राइवेट भागीदारी, एक मजबूत और सरकारी मालिकाना हक वाले इसरो के साथ-साथ चल सकती है और चलनी भी चाहिए,” लेकिन बिना पारदर्शी बहस और सुरक्षा उपायों के ऐसी पॉलिसी नहीं अपनाई जा सकती “जिससे इसरो के सिर्फ़ रिसर्च एंड डेवलपमेंट तक सीमित रह जाने का खतरा हो।”

इस संयुक्त चिट्ठी पर ISRO स्टाफ एसोसिएशन, SHAR एम्प्लॉई एसोसिएशन, ISAC एम्प्लॉई एसोसिएशन, ISRO स्टाफ एसोसिएशन – LPSC, ISRO स्टाफ एसोसिएशन-BBU, NRSA एम्प्लॉई यूनियन स्पेस, एम्प्लॉई एसोसिएशन BBU, ISRO स्टाफ एसोसिएशन-IPRC और SAC एम्प्लॉई वेलफेयर एसोसिएशन ने साइन किया है।

सितंबर में अपनी चिट्ठी में, कर्मचारियों ने लिखित स्पष्टीकरण मांगा था कि क्या लॉन्च व्हीकल के डिज़ाइन, प्रोडक्शन और लॉन्चिंग जैसे मुख्य काम बंद हो जाएंगे। साथ ही, उन्होंने ऐसी पॉलिसी में बदलाव के खिलाफ चेतावनी दी थी जिनसे एजेंसी के सिर्फ़ “रिसर्च एंड डेवलपमेंट बुटीक” बनकर रह जाने का खतरा हो। उन्होंने टैक्सपेयर्स के पैसे से बने इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राइवेट कंपनियों को ट्रांसफर करने पर भी सवाल उठाए और करियर में तरक्की रुकने, कर्मचारियों की संख्या कम होने और भर्ती के मौके घटने को लेकर चिंता जताई।

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या गोयनका के बयान भारत सरकार की आधिकारिक तौर पर मंज़ूर की गई पॉलिसी को दिखाते हैं और वे जानना चाहते थे कि ऐसा फ़ैसला कब लिया गया।

(साभार: द न्यूज़ मिनट)

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