हिंदी सिनेमा की क्लासिक फ़िल्म ‘पाकीज़ा’ बीएफ़आई लंदन फ़िल्म फ़ेस्टिवल में एक नए 4K रेस्टोरेशन के साथ बड़े पर्दे पर लौटने जा रही है। पाकीज़ा के इस नए वर्ज़न का वर्ल्ड प्रीमियर फ्रांस के ल्यों में ‘फेस्टिवल ल्यूमिएर’ में होगा। इसके बाद ‘बीएफ़आई लंदन फिल्म फ़ेस्टिवल’ में इसे दिखाया जाएगा।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, डायरेक्टर कमाल अमरोही की इस यादगार क्लासिक फ़िल्म का संरक्षण ‘फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन’ ने अमरोही परिवार के सहयोग से किया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सेंट्रल लंदन के बीएफ़आई आईमैक्स में होने वाली इस ख़ास स्क्रीनिंग के लिए 18 अक्तूबर 2026 की तारीख चुनी गई है। करीब एक महीने पहले ही सभी टिकटों का ‘सोल्ड आउट’ हो जाना इस बात का सबूत है कि रिलीज़ के 54 साल बाद भी ‘पाकीज़ा’ का जादू बरक़रार है।
इस यादगार फिल्म के निर्माण में 15 साल का समय लगा था। इस फिल्म का निर्माण साल 1957 में शुरू हुआ था और फिर रुक गया। सुनील दत्त और नरगिस के प्रयासों से 1969 में फिल्म का काम दोबारा शुरू हुआ और 4 फरवरी 1972 को यह रिलीज हुई।
हालाँकि शुरुआत में फिल्म ब्लैक एंड व्हाइट बननी थी मगर बाद में इसे रंगीन करने का फैसला लिया गया। इसके बाद कमाल अमरोही ने पाकीज़ा को सिनेमास्कोप में बनाने का फै़सला लिया और इस तरह से फ़िल्म में एक बार फिर से देरी हुई।
फिल्म में मीना कुमारी ने साहिबजान का इतना जीवंत किरदार निभाया जो हमेशा के लिए यादगार हो गया। रिलीज के कुछ ही सप्ताह बाद 31 मार्च 1972 को मीना कुमारी का निधन हो गया। उनके निधन ने फिल्म को एक भावनात्मक विरासत में बदल दिया और इसे बेमिसाल शोहरत मिली।