वैज्ञानिकों ने लैब में शनि के चांद एन्सेलेडस की बर्फीली सतह के नीचे समुद्र जैसा माहौल बनाने और उसमें धरती पर पाए जाने वाले एक माइक्रोब को ज़िंदा रखने से जुड़ा एक प्रयोग किया और उसमें कामयाबी हासिल की है।
जर्मनी के रिसर्चर्स ने लैब में एन्सेलेडस (Enceladus) की बर्फीली सतह के नीचे समुद्र के संभावित हालात की नकल की, जिसमें पानी, नमक, कार्बोनेट और चट्टान के कणों का इस्तेमाल करके चांद के बहुत ज़्यादा एल्कलाइन समुद्र और उसके नीचे होने वाले केमिकल प्रोसेस की नकल की गई।
इस लैब मॉडल को बनाने के लिए जर्मनी के फ्रेई यूनिवर्सिटी (Freie Universität Berlin) और अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों ने एन्सेलेडस के समुद्र तल और बर्फीली परत के नीचे जैसी कठिन परिस्थितियों (अत्यधिक क्षारीय पानी और कम ऑक्सीजन) का एक मॉडल अपनी लैब में तैयार किया।
रिसर्चर्स ने इस माहौल में मीथेनोथर्मोकोकस ओकिनावेंसिस नाम का एक माइक्रोब डाला, जो धरती पर गहरे समुद्र में हाइड्रोथर्मल वेंट के पास पाया जाता है। मुश्किल हालात के बावजूद, माइक्रोब न सिर्फ़ ज़िंदा रहा बल्कि उसमें कई गुना बढ़ भी गया।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, एन्सेलेडस को इन खासियतों की वजह से सोलर सिस्टम में धरती के बाहर जीवन की खोज के लिए पहले से ही एक ज़रूरी जगह माना जाता है।
नासा के कैसिनी स्पेस मिशन को चांद की बर्फीली परत के नीचे एक बड़े नमकीन समुद्र, ऑर्गेनिक कंपाउंड और हाइड्रोजन होने के सबूत मिले थे, जबकि समुद्र तल में हाइड्रोथर्मल एक्टिविटी की भी संभावना है।
एन्सेलाडस की एक खास बात यह है कि इसके साउथ पोल के पास की दरारों से पानी की भाप और बर्फ के कणों के बड़े-बड़े फव्वारे स्पेस में निकलते हैं। कैसिनी स्पेसक्राफ्ट भी इन फव्वारों से होकर गुजरा है और उनका एनालिसिस किया है।
एक अलग स्टडी से यह भी पता चला है कि समुद्र में मौजूद अलग-अलग मटीरियल जमने की प्रक्रिया के दौरान खास बर्फ के कणों में सुरक्षित रह सकते हैं, जिससे भविष्य के स्पेस मिशन के लिए बायोलॉजिकल निशान ढूंढना आसान हो सकता है।
साइंटिस्ट ने साफ किया है कि यह एक्सपेरिमेंट एन्सेलाडस पर जीवन की मौजूदगी साबित नहीं करता है। रिसर्च में धरती पर विकसित हुए माइक्रोब्स का इस्तेमाल किया गया, जबकि यह पता नहीं है कि एन्सेलाडस पर कभी स्वतंत्र रूप से जीवन उभरा था या नहीं।