मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ विपक्ष की ओर से महाभियोग चलाने की मांग ज़ोर पकड़ रही है। यह मांग ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट के बाद तेज़ हो रही है जिसमें एसआईआर अभियान के दौरान चुनाव आयुक्तों को कई फ़ैसलों की जानकारी नहीं दी देने और दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा इन फ़ैसलों पर बार-बार आपत्ति जताने का मामला सामने आया है।
इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते दस माह में आयोग के कई फ़ैसलों पर आपत्ति दर्ज की है।
इस बीच दोनों चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच बने मतभेद के चलते 18 साल के युवा मतदाताों को वोटर लिस्ट में शामिल करने का मामला भी उलझ गया है। नतीजे में नई लिस्ट जारी करने में देरी हो रही है।
हालाँकि मीडिया के सामने अपना पक्ष रखते हुए चुनाव आयोग का कहना है कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया है। साथ ही आयोग एसआईआर सहित पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम फैसलों के सर्वसम्मति से लिए जाने की बात भी कह रहा है।
इन मतभेदों के कारण 18 साल के युवाओं को वोटर लिस्ट में शामिल करने के सालाना बदलाव जैसे महत्वपूर्ण फैसले पर असर पड़ा है। हालाँकि इसकी घोषणा मई-जून में होने थी मगर मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों के बीच आम सहमति न बन पाने के कारण समय-सीमा निकल चुकी है। गौरतलब है कि वोटर लिस्ट हर राज्य में जनवरी के पहले हफ्ते में बिना किसी चूक के आधिकारिक तौर पर जारी होती है।
गौरतलब है कि चुनाव आयुक्त बनाये जाने के महज़ एक साल बाद ही ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिए जाने के चलते उनका कार्यकाल ख़ासा विवादों में रहा है। इस बीच अपने कई फ़ैसलों के कारण विपक्ष भी उन्हें निशाना बनाया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष के नेता उन प्रदेशों में दोबारा चुनाव की मांग कर रहे हैं जहाँ एसआईआर में नामों के काटे जाने या जोड़े जाने को वहअपनी हार का ज़िम्मेदार मान रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कहा था, ‘मोदी सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन के लिए 2023 में जो नया क़ानून ‘द चीफ़ इलेक्शन कमिश्नर एंड अदर इलेक्शन कमिश्नर एक्ट’ लेकर आई है, इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। अभी तक सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर तीन ऑर्डर पास किए हैं और अगली सुनवाई 19 फ़रवरी को होनी है।’
1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार ने फरवरी 2025 में भारत के 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद संभाला था। इस पद पर पहुँचने के समय उसके द्वारा लिए गए संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के अलावा राम मंदिर न्यास की स्थापना जैसे मामले चर्चा में रहे थे।