दुनिया के सामने एक स्पष्ट विकल्प है- क्या हम जंगल के क़ानून की ओर वापिस जाकर जीना चाहते हैं, या फिर हम एक सभ्य अन्तरराष्ट्रीय समाज में रहना चाहते हैं। यूएन महासभा में फ़्राँसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस विचार के साथ अपना पक्ष रखा।
यूएन महासभा के 81वें सत्र के दौरान जनरल डिबेट में जुटे प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए फ़्राँसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जनरल डिबेट में जुटे प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए यह बात कही।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सम्प्रभुता के विषय में दोहरे मानकों को अपनाए जाने की कठोर निन्दा करते हुए कहा- ‘कितनी बार हमने सुना है कि योरोप में लोगों की सम्प्रभुता मायने रखती है, लेकिन जब बात मध्य पूर्व व अफ़्रीका की हो तो इसे नज़रअन्दाज़ भी किया जा सकता है।’
इमैनुएल मैक्रों ने ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में फ़लस्तीनियों के लिए अपने समर्थन पर बल देते हुए कहा कि कुछ का दावा है कि ग़ाज़ा में शान्ति हासिल हो गई है लेकिन फिर भी मानवीय सहायता गलियारों ने अभी मूर्त रूप नहीं लिया है। उन्होंने रूसी आक्रमण से जूझ रहे यूक्रेन के लिए अपने समर्थन को दोहराया और मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थित होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आवाजाही की आज़ादी बहाल करने पर बल दिया।
एआई स्वतंत्रता के हवाले से अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निहित ख़तरों का भी उल्लेख किया, विशेष रूप से एआई टैक्नॉलॉजी के नियामन, संचालन व्यवस्था पर, जिसमें विश्व आबादी के एक बड़े हिस्से व देशों की कोई आवाज़ नहीं है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि यह विषय केवल अमरीका व चीन, और चंद निजी पक्षों पर नहीं छोड़ा जा सकता है। उनके अनुसार, बहुत कुछ दाँव पर लगा हुआ है, एक ऐसी टैक्नॉलॉजी पर जोकि राष्ट्रों, अस्पतालों और बैंकों की सुरक्षा को ख़तरे में डाल सकती है।