कहीं आप अपने घर के दूषित वातावरण से बेखबर तो नहीं!

इंडोर एयर पॉल्यूशन से बेखबर लोगों को पता होना चाहिए कि यह ऐसे हालात हैं जब घर के अंदर का वातावरण बाहर से ज़्यादा दूषित होता है। इसके कई कारण है और इनकी अनदेखी कई बीमारियों को न्योता दे सकती है।

ऐसे में केवल बाहर के प्रदूषण से बचना ही काफी नहीं है। अच्छी सेहत के लिए ज़रूरी है कि घर के अंदर की हवा की सफाई का भी पूरा ध्यान रखा जाए।

अधिकतर लोगों का मानना यह है कि बाहर का वातावरण दूषित होता है और घर को इससे बचाने के लिए वह इसे पूरी तरह पैक रखने पर फोकस करते हैं। जबकि घरों में मौजूद विभिन्न प्रकार के केमिकल्स सहित खाना पकाने और तंबाकू का धुआं, अगरबत्ती, फफूंद, नमी आदि कई प्रदूषक अंदर के वातावरण को बर्बाद करते हैं।

बल्कि अकसर स्थिति यह होती है कि घर के बाहर की हवा, घर के अंदर की हवा से ज्यादा बेहतर हो जाती है। यह दूषित हवा कई बीमारियों को दावत देती है। इनमें सांस से जुड़ी समस्याएं सबसे ज़्यादा सामने आती हैं। दरअसल घर के अंदर मौजूद धुआं और दूषित तत्व सांस की नली में दाखिल होकर खांसी, सांस फूलना या गले में खराश जैसी समस्या का कारण बनते हैं।

इस समस्या का सबसे बुरा असर छोटे बच्चों पर पड़ता है। दरअसल बच्चों का श्वसन तंत्र विकसित हो रहा होता है इसलिए इंडोर एयर पॉल्यूशन को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। इस इंडोर पॉल्यूशन से कुछ लोगों में अस्थमा के लक्षणों को ट्रिगर होने में मदद मिलती है।

घरों में मौजूद यह प्रदूषण अकसर एलर्जी और आंखों में जलन जैसी समस्या पैदा करते हैं। संवेदनशील लोगों में छींक, नाक बहना, आंखों में आदि की समस्या भी सामने आती है।

कुछ लोगों को वेंटिलेशन की खराबी के साथ इंडोर पॉल्यूशन के कारण सिरदर्द, चक्कर या असहजता जैसी समस्या हो सकती है। क्यूंकि लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए ज़रूरी है कि समस्या होने का इंतजार करने के बजाय घर की इंडोर एयर क्वालिटी पर फिक्स किया जाए और इसे इकोफ्रेंडली बनाने पर ज़ोर दिया जाए।

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