नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने हिमालय इलाक़े में जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि नेपाल को जलवायु परिवर्तन के कारण सामने आ रही आपदाओं की गंभीरता को दुनिया के सामने और मजबूती से रखना होगा।
नेपाली संसद के निचला सदन यानी प्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि इस आपदा ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह घटना इतनी भयावह कैसे हुई और भविष्य में नेपाल को ऐसी आपदाओं के लिए किस तरह तैयार होना होगा?
उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से अचानक सामने आई इस बड़ी आपदा ने हमें चौबीसों घंटे नुकसान को नियंत्रित करने में जुटे रहने को मजबूर कर दिया है। साथ ही हमारे मन में एक गहरा सवाल भी उठा है कि आखिर यह आपदा हमारे सामने कैसे आई?”
शाह ने अपने सम्बोधन में कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब केवल पर्यावरणीय चिंता नहीं रह गए हैं, बल्कि वे मानव जीवन, बुनियादी ढांचे और भविष्य की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। गौरतलब है कि फ्लैश फ्लड को आठ दिन बीत चुके हैं और विनाशकारी बाढ़ के बाद मृतकों की संख्या 1,100 के पार पहुंच गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबिक, एनडीआरआरएमए यानी राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बुधवार सुबह 9 बजे तक पिछले सप्ताह आई बाढ़ में बह गए 1,114 शव बरामद किए जा चुके थे, जबकि करीब 3,916 लोग अब भी लापता हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि, नेपाल-चीन सीमा के पास भोटेकोशी नदी की सहायक नदी लेंगडे खोला में लैंडस्लाइड के चलते पानी का प्राकृतिक अवरोध बन गया था। बाद में पानी के भारी दबाव से यह प्राकृतिक बांध टूटने से अचानक आई बाढ़ ने भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबे के साथ नीचे की ओर तबाही मचा दी। बाढ़ आगे त्रिशूली नदी की ओर बढ़ी और रास्ते में बस्तियों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
प्रधानमंत्री शाह ने विशेषज्ञों के आकलन का हवाला देते हुए कहा कि यह घटना हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से बढ़ते जोखिमों की गंभीर चेतावनी है। उन्होंने कहा, “हमें जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप सामने आ रही आपदाओं के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जागरूक करना होगा। जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक चुनौती है। इसके प्रभावों से निपटना और उन्हें कम करने के प्रयास पूरे वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी हैं।”
शाह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते चेतावनी पहुंचाने में सरकार की भूमिका पर उठे सवालों का भी जवाब देते हुए कहा, ‘जैसे ही हमें जानकारी मिली कि बाढ़ आ रही है, हमारे सुरक्षा कर्मियों को लोगों को सतर्क करने के लिए तैनात किया गया। हालांकि, वे खुद इस अभियान के दौरान लापता हो गए।’
आगे उन्होंने बताया कि बचावकर्मियों ने जहां तक संभव हुआ, रेंगकर प्रभावित इलाकों तक पहुंचने का प्रयास किया। शाह के मुताबिक, जब खुदाई करने वाली मशीनों के लिए स्थिर जमीन और हेलीकॉप्टरों के उतरने के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध हुआ, तभी बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया जा सका।
नेपाल के राहत और बचाव अभियान में सहयोग के लिए भारत और चीन समेत कई देशों तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का आभार जताते हुए प्रधानमंत्री शाह ने भारत, चीन, अमरीका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, स्विट्जरलैंड, सिंगापुर, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश का विशेष रूप से उल्लेख किया।
साथ ही उन्होंने एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी नेपाल की आपदा प्रतिक्रिया में सहयोग की बात कही। साथ ही कई अन्य मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा नेपाल को आगे सहायता देने के आश्वासन की बात भी उन्होंने कही।