डॉक्टर रेणु त्रिपाठी को नेशनल टीचर्स अवॉर्ड 2026 के लिए चुना गया है। वह 63 साल की उम्र में यू ट्यूब से छात्रों को साइंस पढ़ाती हैं। इसके साथ ही उन्होंने 12 किताबें लिखी हैं।
साल 2006 से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के विजय नगर स्थित गवर्नमेंट बालिका इंटर कॉलेज में विज्ञान पढ़ाने वाली डॉक्टर रेणु ने विज्ञानं जैसे विषय में पढ़ने की लगन के साथ साबित किया है कि सीखने और सिखाने की कोई उम्र नहीं होती।
शिक्षा के क्षेत्र में लगातार इनोवेशन करती रहने वाली डॉक्टर रेणु 12 किताबें लिख चुकी हैं। उनके इसी योगदान को देखते हुए उनका चयन नेशनल टीचर्स अवाॅर्ड 2026 के लिए हुआ है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें सम्मानित करेंगी।
नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, डॉक्टर रेणु त्रिपाठी आज भी बच्चों को साइंस पढ़ाने में सक्रिय हैं। वह 2006 से यूपी के गाजियाबाद के विजय नगर स्थित बालिका इंटर काॅलेज में पढ़ाती हैं। उन्होंने 63 की उम्र में टेक्नोलाॅजी को भी शिक्षण का माध्यम बनाया और यू ट्यूब के माध्यम से छात्रों को साइंस पढ़ाती हैं। उनकी द्वारा दी गई शिक्षा सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों के लिए माॅडल और फील्ड विजिट भी शामिल है।
खबर के मुतबिक, डॉक्टर रेणु त्रिपाठी का करियर एक टीचर के रूप में नहीं शुरू हुआ था। साल 1987 में उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में प्रोजेक्ट ऑफिसर के तौर पर काम शुरू किया था। उनकी जिम्मेदारी स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान करना, उन्हें समझाना और फिर से शिक्षा से जोड़ना था। इस दौरान शिक्षा के प्रति उनका जुड़ाव और मजबूत हुआ।
रिपोर्ट में ऑफिशियल वेबसाइट renutripathi.com के हवाले से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बाद में उन्होंने अपने पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए टीचिंग में अपना करियर बनाया। साल 2006 से वह गाजियाबाद के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में साइंस पढ़ा रही हैं।
उनके शिक्षा के सफर की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डॉक्टर त्रिपाठी ने 63 साल की उम्र में खुद को बदलती टेक्नोलाॅजी के साथ जोड़े रखा है। वह छात्रों को पढ़ाने के लिए 2 यूट्यूब चैनल का इस्तेमाल करती हैं और डिजिटल मीडियम से साइंस के स्टूडेंट्स को टाॅपिक्स समझाने की कोशिश करती हैं। उनकी अपनी वेबसाइट पर भी साइंस ई-कंटेंट (Science E-Content) उपलब्ध हैं। वेबसाइट पर YouTube और SlideShare एजुकेशन कंटेंट भी दिया गया है।
डॉक्टर त्रिपाठी केवल किताब और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं है। वह स्टूडेंट्स के लिए पढ़ाई को आसान बनाने के लिए माॅडल और फील्ड विजिट पर भी फोकस करती हैं। स्टूडेंट्स को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर विषय समझाने पर उनका जोर रहता है। उनके स्टडी मटीरियल में टीचिंग-लर्निंग माॅडल (Teaching-Learning Models) भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने NEP 2020 के तहत कई ऐसे शिक्षण संसाधन तैयार किए हैं, जिनसे छात्र विज्ञान को गतिविधियों और प्रयोगों के माध्यम से समझ सकें। इससे स्टूडेंट्स उनके पढ़ाई के तरीके को भी पसंद करते हैं।
पढ़ाने के साथ-साथ डॉ. रेनू त्रिपाठी का लेखन और शैक्षणिक सामग्री तैयार करने का काम भी जारी रहा। वह 12 किताबें लिख चुकी हैं और कई रिसर्च पेपर भी लिखे हैं। उनकी वेबसाइट पर पब्लिश बुक्स के साथ E-Content और E-Learning के अलग-अलग सेक्शन मौजूद हैं।
करीब दो दशक से अधिक समय तक साइंस विषय में उनके योगदान के कारण डॉक्टर रेनू त्रिपाठी को राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिली है। भारत सरकार ने उन्हें नेशनल टीचर्स अवाॅर्ड 2026 के लिए चुने गए 48 स्कूल शिक्षकों में शामिल किया है। ऑफिशियल लिस्ट में उनका नाम उत्तर प्रदेश के गवर्मेंट बालिका इंटर काॅलेज, विजय नगर, गाजियाबाद के साथ दर्ज है।
खबर के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में चयनित शिक्षकों को सम्मानित करेंगी। उन्होंने अपने इस पुरस्कार का श्रेय अपने ससुर संस्कृति के विद्वान आचार्य भगवानदास त्रिपाठी को दिया।