सरकार हलके वाहनों से जुड़े नए नियम ला रही है। अब कम रफ़्तार वाले लो-पावर ई-टू-व्हीलर्स और ई-साइकिल के लिए सरकार जो नए नियम ला रही है, उसमे आरटीओ रजिस्ट्रेशन अलावा भारी-भरकम नियमों से बड़ी छूट मिल सकती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एक बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। इसके तहत सरकार ने सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स (CMVR), 1989 में संशोधन का नया ड्राफ्ट जारी कर दिया है। ऐसी में अब सीमित रफ्तार और पावर वाले टू-व्हीलर्स को मोटर व्हीकल के कड़े नियम से बाहर रखने की योजना है।
इन नए नियमों के पहली अक्टूबर 2026 से लागू किए जाने का प्रस्ताव है। हालांकि, इससे पहले सरकार अंतिम नोटिफिकेशन जारी करेगी और इन नियमों में बदलाव भी हो सकता है।
मंत्रालय की ओर से यह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन G.S.R. 760(E) के माध्यम से जारी किया गया है। इस ड्रॉफ्ट नोटिफिकेशन के प्रस्तावित नियमों के अनुसार, अगर वाहन तय शर्तों को पूरा करता है तो उसे मोटर वाहन नहीं माना जाएगा।
किन वाहनों को मिलेगा लाभ
ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक़, दो पहियों वाला बैटरी से चलने वाला वाहन मोटर वाहन नहीं माना जाएगा।
वाहन में लगा इलेक्ट्रिक मोटर 30 मिनट के टाइम पीरियड में 0.6 किलोवाट से कम पावर वाला होना चाहिए। इसके साथ ही वाहन की हाई स्पीड 25 किलोमीटर प्रति घंटा से कम होनी चाहिए।
वाहन में सही तरीके से काम करने वाले ब्रेक भी होने चाहिए। इसके साथ ही आगे की ओर सफेद रेट्रो रिफ्लेक्टर और पीछे की ओर लाल रेट्रो रिफ्लेक्टर लगाना जरूरी होगा।
इन सभी शर्तों की जांच और प्रमाणन सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के तहत तय की गई टेस्टिंग एजेंसी से करवाना जरूरी होगा।
ई-साइकिल के लिए नियम
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने पैडल-असिस्ट वाली इलेक्ट्रिक साइकिल के लिए भी कुछ खास शर्तें प्रस्तावित की हैं।
इसके लिए ई-साइकिल में इलेक्ट्रिक मोटर की 30 मिनट की पावर 0.6 किलोवाट से कम होनी चाहिए।
जैसे-जैसे साइकिल की स्पीड 25 किलोमीटर प्रति घंटा के पास पहुंचेगी, मोटर की सहायता धीरे-धीरे कम होनी चाहिए। स्पीड 25 किलोमीटर प्रति घंटा पहुंचने पर मोटर पूरी तरह बंद हो जानी चाहिए।
साइकिल चालक यदि पेडल चलाना बंद कर देता है तो मोटर को इससे पहले ही बंद हो जाना चाहिए यानी पेडल-असिस्ट ई-साइकिल में मोटर की मदद प्रस्तावित स्पीड लिमिट के अंदर ही रहनी होगी।
बताते चलें कि अभी ये नियम ड्राफ्ट की स्थिति में हैं। यही कारण है कि सरकार ने प्रस्तावित बदलावों को लेकर लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। जिन लोगों या संस्थाओं पर इन बदलावों का असर पड़ सकता है, वे अपने सुझाव सरकार के पास भेज सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटिफिकेशन को जनता के लिए उपलब्ध कराए जाने के तीस दिन बाद इन प्रस्तावित नियमों पर विचार किया जाएगा। इस दौरान मिलने वाली आपत्तियों और सुझावों को भी सरकार ध्यान में रखेगी।