वैश्विक स्तर पर अब तक का दूसरा सबसे गर्म महीना जुलाई रहा: विश्व मौसम विज्ञान संगठन

चरम मौसम के व्यापक असर पर क्लेयर नलिस ने कहा कि चरम मौसम केवल गर्मी तक सीमित नहीं है। एजेंसियों के साथ साझा नवीनतम आकलन में इस सप्ताह पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत, पूर्वी पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्याँमार तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में भारी बारिश, अचानक बाढ़ एवं भूस्खलन का ख़तरा जताया गया है।

दुनिया के कई हिस्से भीषण गर्मी सहित सूखे और जंगलों की आग के अलावा अन्य चरम मौसम का सामना कर रहे हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन का कहना है कि लोगों के जीवन और आजीविका की रक्षा के लिए बेहतर मौसम पूर्वानुमान और समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियाँ बेहद ज़रूरी हैं।

जुलाई को अब तक का दूसरा सबसे गर्म महीना बताया जा रहा है। योरोपीय संघ की कॉपरनिकस जलवायु परिवर्तन सर्विस (C3S) के आँकड़ों का हवाला देते हुए यह कहना है डब्ल्यूएमओ यानी विश्व मौसम विज्ञान संगठन का।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, औसत सतही वायु तापमान, औद्योगीकरण-पूर्व स्तर से 1.47 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा जबकि जुलाई में समुद्र की सतह का तापमान अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर दर्ज किया गया।

अगस्त में भी भीषण गर्मी जारी है। योरोप और उत्तरी गोलार्ध के अन्य हिस्सों में यह छुट्टियों का मौसम है लेकिन विश्व मौसम विज्ञान संगठन की प्रवक्ता क्लेयर नलिस की माने तो उनका कहना है कि कई सेवाओं और कर्मियों के लिए राहत का समय नहीं है।

उन्होंने जिनीवा में पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रीय मौसम एवं जल विज्ञान सेवाएँ, आपात प्रबन्धन व राहत टीमें और स्वास्थ्यकर्मी चरम मौसम की घटनाओं के कारण लगातार काम कर रहे हैं। आगे उन्होंने यह भी कहा, ‘यह सिर्फ़ भीषण गर्मी की बात नहीं है। भारी बारिश और उष्णकटिबन्धीय चक्रवात भी देखने को मिल रहे हैं। इसलिए हमारे लिए यह बिल्कुल भी छुट्टी का समय नहीं है।’

गर्मी, सूखा और जंगल की आग का ख़तरा
जून-जुलाई की अवधि पश्चिमी योरोप में अब तक की सबसे गर्म रही। स्विट्ज़रलैंड और फ्रांस समेत कुछ देश इस गर्मी की चौथी तापलहर से जूझ रहे हैं।क्लेयर नलिस ने कहा कि भीषण सूखे से खेती, फ़सलों, परिवहन, ऊर्जा और नदियों के जलस्तर पर गहरा असर पड़ रहा है। ऊँचे तापमान के कारण जंगलों में आग का ख़तरा भी बढ़ गया है।

गर्मी केवल योरोप तक सीमित नहीं है। जापान और कोरिया गणराज्य में पिछले सप्ताह असाधारण और रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज किया गया, जबकि एशिया, मध्य पूर्व और लातिन अमरीका के अन्य हिस्सों में भी भीषण गर्मी रही।

डब्ल्यूएमओ में जलवायु सूचना प्रमुख जॉन कैनेडी ने कहा कि कम बारिश और तेज़ गर्मी से सूखा बढ़ा है, नदियों का जलस्तर घटा है और जंगलों में आग का ख़तरा बढ़ा है। योरोप की प्रमुख नदियों सेन, राइन और डैन्यूब में भी जल प्रवाह कम हुआ है।

जंगलों में ‘असाधारण आग’
जंगलों में आग की घटनाएँ भी बढ़ी हैं। क्लेयर नलिस ने कहा कि पिछले महीने पश्चिमी योरोप में जंगलों की आग असाधारण स्तर पर रही, चाहे जले हुए क्षेत्र की बात हो या उससे हुए उत्सर्जन की।

कॉपरनिकस वायुमंडल निगरानी सेवा के आँकड़ों के अनुसार, फ्रांस में जंगलों की आग से इस साल अब तक जितना उत्सर्जन हुआ है, वह 2022 और 2023 के भीषण आग वाले वर्षों के बराबर या उससे भी अधिक है।

फ्रांस में इस साल जंगलों की आग इतनी भीषण रही है कि यह पिछले 24 वर्षों के सबसे अधिक प्रभावित वर्षों में से एक बन सकता है। पड़ोसी स्पेन में भी आग से होने वाला उत्सर्जन सामान्य से काफ़ी अधिक है।

अमरीका के पश्चिमी हिस्सों में जंगलों की आग भड़क रही है, जबकि कैनेडा में सोमवार तक 591 जगहों पर आग सक्रिय थी, जिनमें से 43 पर क़ाबू नहीं पाया जा सका था।

चरम मौसम का व्यापक असर
क्लेयर नलिस ने कहा कि चरम मौसम केवल गर्मी तक सीमित नहीं है। पश्चिम अफ़्रीका के कुछ हिस्से भारी मानसूनी बारिश और बाढ़ से भी प्रभावित हैं।डब्ल्यूएमओ हर सप्ताह वैश्विक मौसम एवं जलविज्ञान आकलन (Global Hydromet Scan) जारी करता है, जिसे मानवीय सहायता एजेंसियों के साथ साझा किया जाता है। नवीनतम आकलन में इस सप्ताह पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत, पूर्वी पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्याँमार तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में भारी बारिश, अचानक बाढ़ एवं भूस्खलन का ख़तरा जताया गया है।

उधर, चीन में पिछले सप्ताहान्त चक्रवाती तूफ़ान डॉल्फिन के तट से टकराने से पहले बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। यह इस मौसम का 13वाँ चक्रवात था। हाल के दिनों में वहाँ भीषण बाढ़ के ख़तरे को लेकर भी कई चेतावनियाँ जारी की गई हैं।

प्रशान्त महासागर में अल-नीनो की स्थिति बन चुकी है और डब्ल्यूएमओ ने वैश्विक तापमान में और बढ़ोत्तरी की आशंका जताई है। वैश्विक तापमान आमतौर पर अल-नीनो के चरम पर पहुँचने के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुँचता है। अल-नीनो का चरम प्रायः नवम्बर से जनवरी के बीच होता है।

इन हालात को देखते हुए, डब्ल्यूएमओ और उसके सदस्य देश मौसम पूर्वानुमान और समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियों को बेहतर बनाने में जुटे हैं। क्लेयर नलिस ने कहा कि सर्वजन के लिए प्रारम्भिक चेतावनी पहल अब भी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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