वैज्ञानिकों का कहना है कि जांघ की लंबाई डायबिटीज के खतरे का पता लगाने में मदद कर सकती है। इससे जुड़ा एक अध्ययन बताता है कि छोटे पैरों वाले लोगों को डायबिटीज होने का खतरा ज़्यादा होता है।
इस अध्ययन की रिपोर्ट जर्नल ऑफ क्लिनिकल एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट में डेनमार्क की टेक्निकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डॉ. डैनियल यू ने कहते हैं, ब्लड टेस्ट से आसानी से टाइप-2 डायबिटीज का पता लगाया जा सकता है। लेकिन अगर आपको शक ही नहीं है कि आपको डायबिटीज हो सकती है, तो आप जांच कराने डॉक्टर के पास जाएंगे ही नहीं। ऐसे में घर पर ऑनलाइन किया जाने वाला ऐसा टेस्ट लोगों को डॉक्टर से जांच कराने के लिए प्रेरित कर सकता है।
रिसर्चर्स के मुताबिक, जांघें शरीर का सबसे बड़ा मसल ग्रुप हैं, और ये मसल्स खून से शुगर एब्जॉर्ब करने में अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए, जिन लोगों के पैर काफ़ी छोटे होते हैं, उनमें मसल्स कम हो सकती हैं, जिससे खून से शुगर एब्ज़ॉर्ब करने की उनकी क्षमता कम हो सकती है और डायबिटीज़ का खतरा बढ़ सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों की मानें तो दुनियाभर में 589 मिलियन (करीब 59 करोड़) लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। जिस रफ़्तार से यह बीमारी बढ़ रही है ऐसे में विशेषज्ञों को चिंता है कि साल 2050 तक ये आंकड़ा बढ़कर 85 करोड़ से ऊपर जा सकता है।
यूके में अभी 4 मिलियन से ज़्यादा लोगों को डायबिटीज है, जिनमें से लगभग 90 प्रतिशत मामले टाइप 2 डायबिटीज के हैं। अनुमान है कि 1.3 मिलियन लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन अभी तक उनका पता नहीं चला है।
अब डेनमार्क के वैज्ञानिकों की एक टीम का कहना है कि उन्हें इस समस्या का एक संभावित हल मिल गया है। उनके अनुसार एक आसान सेल्फ-डायग्नोसिस टेस्ट जो घर पर किया जा सकता है, जिसमें जांघ की लंबाई और दूसरी चीज़ों को मापा जाता है।
डेनमार्क की टेक्निकल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर डॉ. डेनियल यू का कहना है कि टाइप 2 डायबिटीज का पता ब्लड टेस्ट से आसानी से लगाया जा सकता है, लेकिन अगर किसी व्यक्ति को शक नहीं है कि उसे डायबिटीज है, तो वह ब्लड टेस्ट के लिए डॉक्टर के पास नहीं जाएगा। इसीलिए घर पर ऑनलाइन टेस्ट लोगों को डॉक्टर से सलाह लेने के लिए बढ़ावा दे सकता है।
इस टेस्ट का नाम मेडवैक्स है। इसे ऑनलाइन लिया जा सकता है और इसे यूएस नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे से मिले 30 साल के हेल्थ डेटा की मदद से बनाया गया है। टेस्ट में सात अलग-अलग फैक्टर के बारे में सवाल पूछे जाते हैं, साथ ही व्यक्ति के जेंडर, उम्र और बॉडी मास इंडेक्स जैसी बेसिक जानकारी भी ली जाती है। यह सारी जानकारी घर पर एक टेप मेज़र, बाथरूम स्केल और एक सिंपल ब्लड प्रेशर मॉनिटर की मदद से इकट्ठा की जा सकती है।
रिसर्चर्स के मुताबिक, डायबिटीज के खतरे से जुड़ा सबसे हैरान करने वाला संकेत जांघ की छोटी लंबाई थी। उन्होंने लिखा कि जांघ की हड्डी (फीमर) की लंबाई बच्चों के न्यूट्रिशनल स्टेटस के बारे में जानकारी देती है। जीवन के शुरुआती सालों में खराब न्यूट्रिशन हड्डियों के विकास पर थोड़ा असर डालता है और दशकों बाद डायबिटीज के बढ़ते खतरे से इसका गहरा संबंध है।
कई लोगों में डायबिटीज के लक्षण धीरे-धीरे दिखने लगते हैं। इनमें थकान, बहुत ज़्यादा प्यास लगना और बार-बार पेशाब आना शामिल है। यही वजह है कि इस बीमारी का सालों तक पता नहीं चल पाता है। रिसर्चर्स की चिंता यह भी है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के डायबिटीज के शिकार होने पर कई अन्य बीमारियां जैसे आंखों-किडनी, हृदय रोग आदि का भी खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इन लोगों में डायबिटीज के साथ कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का भी जोखिम हो सकता है।