बॉलीवुड एक्टर सनी देओल ने युवाओं से पिछले दिनों अपनी आने वाली फ़िल्म ‘बंटवारा 1947’ देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसकी कहानी उन्हें बंटवारे की मानवीय कीमत समझने और यह एहसास करने में मदद करेगी कि “इंसानियत से बढ़कर कुछ नहीं है”।
देओल ने कहा कि उनकी पिछली फ़िल्मों में अलग-अलग किरदार और कहानियाँ थीं और ‘बंटवारा 1947’ भी इसी तरह एक अलग कहानी है। उन्होंने कहा, “यह एक ऐसी फ़िल्म है जिसे सभी बच्चों और आज के युवाओं को देखना चाहिए। उन्हें पता चलेगा कि बंटवारे के दौरान परिवारों के साथ क्या हुआ था, उस समय जब लोगों को यह भी समझ नहीं आ रहा था कि उनके साथ क्या हो रहा है। इस फ़िल्म को देखने के बाद आपको यकीन हो जाएगा कि इस दुनिया में इंसानियत से बढ़कर कुछ नहीं है।”
बताते चलें कि सनी देओल, एक्ट्रेस प्रीति जिंटा और अपने बेटे करण देओल के साथ फ़िल्म के प्रमोशन के लिए लखनऊ में थे। यह फ़िल्म 14 अगस्त को रिलीज़ होने वाली है।
सनी ने बताया कि यह फ़िल्म उनकी 2001 की ब्लॉकबस्टर ‘गदर: एक प्रेम कथा’ से अलग है। देओल ने स्पष्ट किया कि उनकी पिछली फ़िल्म मुख्य रूप से एक लव स्टोरी थी। उनके जो भारत-पाकिस्तान के रिश्तों और बंटवारे की पृष्ठभूमि पर बनी थी।
इस फिल्म के हवाले से सनी कहते हैं कि अगर आपको ट्रेलर पसंद आया, तो मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि आपको फ़िल्म भी पसंद आएगी।
संतोषी के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए देओल ने कहा कि उनका साथ ‘घायल’ से शुरू हुआ और ‘दामिनी’ और ‘घातक’ में भी जारी रहा। आगे उन्होंने बताया कि इन तीन फ़िल्मों की वजह से हम आज भी साथ हैं और इसीलिए हम एक साथ चौथी फ़िल्म कर पा रहे हैं।
आठ साल के गैप के बाद फ़िल्मों में वापसी कर रहीं जिंटा ने कहा कि ‘बंटवारा 1947’ उनकी 2004 की फ़िल्म ‘वीर-ज़ारा’ से अलग है, भले ही दोनों में भारत-पाकिस्तान की थीम शामिल है। उन्होंने कहा, “वह फ़िल्म एक लव स्टोरी थी और यह एक फ़ैमिली फ़िल्म है, जो एक परिवार की कहानी पर आधारित है।”
आमिर खान प्रोडक्शंस द्वारा प्रोड्यूस और नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले फ़िल्ममेकर राजकुमार संतोषी द्वारा डायरेक्ट की गई ‘बंटवारा 1947’, असगर वजाहत के नाटक ‘जिस लाहौर नई वेख्या ओ जम्याई नई’ पर आधारित है। ‘बंटवारा 1947’ में शबाना आज़मी, अली फ़ज़ल और अभिमन्यु सिंह भी हैं।