क्षेत्रों के बीच गहरी असमानता दिखाते हैं भोजन तक पहुँच से जुड़े आँकड़े

वर्ष 2025 में लगभग 2 अरब 10 करोड़ लोगों, यानि विश्व की एक चौथाई से अधिक आबादी (25.8 प्रतिशत), को मध्यम या गम्भीर खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ा। इसका अर्थ है कि उन्हें कई बार कम भोजन करना पड़ा या पौष्टिक भोजन नहीं मिल सका। हालाँकि, 2024 और 2020 की तुलना में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन खाद्य असुरक्षा अब भी कोविड-19 महामारी से पहले के स्तर से अधिक है।


‘वर्ष 2025 में लगातार तीसरे साल वैश्विक भूख संकट में कमी आई। लेकिन यह प्रगति अब भी नाज़ुक है और 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने के लिए मौजूदा रफ़्तार पर्याप्त नहीं है।’ यह चेतावनी संयुक्त राष्ट्र की पाँच एजेंसियों की ओर से मंगलवार को जारी ‘विश्व में खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति’ (SOFI) रिपोर्ट के नवीनतम संस्करण में दी गई है।

अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनिया की 7.8 प्रतिशत आबादी, यानि लगभग 64 करोड़ 50 लाख लोगों को भूख का सामना करना पड़ा। यह दर 2024 में 8.1 प्रतिशत और 2022 में 8.6 प्रतिशत थी. इसका अर्थ है कि 2024 की तुलना में लगभग एक करोड़ 40 लाख और 2022 की तुलना में चार करोड़ 30 लाख कम लोग भूख से प्रभावित हुए।

हाल के वर्षों में एशिया, लातिन अमरीका और कैरीबियाई क्षेत्र में लगातार सुधार हुआ है। वहीं, पहली बार अफ़्रीका में भूख से प्रभावित लोगों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक हो गई है। वर्ष 2025 में अफ़्रीका में लगभग 30 करोड़ 90 लाख लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिला, जबकि एशिया में यह संख्या 29 करोड़ 20 लाख थी।

अफ़्रीका में भूख की दर 2024 के 20.3 प्रतिशत से घटकर 2025 में 20 प्रतिशत हो गई। फिर भी, तेज़ जनसंख्या वृद्धि के कारण भूख से प्रभावित लोगों की कुल संख्या अब इसी महाद्वीप में सबसे अधिक है।

वर्ष 2025 में अफ़्रीका की आधी से अधिक आबादी, यानि 56.6 प्रतिशत लोग, मध्यम या गम्भीर खाद्य असुरक्षा से प्रभावित थे. इसकी तुलना में यह दर एशिया में 20.3 प्रतिशत, लातिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में 22.9 प्रतिशत तथा उत्तरी अमेरिका और योरोप में 8.7 प्रतिशत थी।

हिसंक टकराव, जलवायु और बढ़ती लागत
वार्षिक SOFI रिपोर्ट खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रकाशित की जाती है।

रिपोर्ट में स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार बुनियादी ढाँचे, शोध एवं विकास, सिंचाई और शीत भंडारण व्यवस्था में निवेश बढ़ाने का आहवान किया गया है. साथ ही, सब्सिडी, व्यापार प्रक्रियाओं और नियामक व्यवस्थाओं में सुधार पर भी ज़ोर दिया गया है।

इन एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में हिंसक टकराव, चरम मौसम और विकास व मानवीय सहायता के लिए धन में कटौती, वैश्विक भूख संकट समाप्त करने की दिशा में हाल की प्रगति को पटरी से उतार सकती है।

पोषण में धीमी प्रगति
इस बीच, पोषण लक्ष्यों की दिशा में प्रगति अब भी अपर्याप्त है। बच्चों में नाटापन, दुबलापन और अधिक वज़न, जन्म के समय कम वज़न तथा केवल स्तनपान जैसे संकेतकों में मामूली सुधार हुआ है, जबकि 15 से 49 वर्ष की महिलाओं में रक्ताल्पता की स्थिति बिगड़ रही है।

वयस्कों में मोटापा भी बढ़ रहा है. इसकी दर 2012 के 12.1 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 16.2 प्रतिशत हो गई।

दुनिया भर में छह से 23 महीने की आयु के केवल 30.8 प्रतिशत बच्चों को अलग-अलग प्रकार के पर्याप्त पौष्टिक खाद्य पदार्थ मिलते हैं। वहीं, पाँच वर्ष से कम आयु के 15 करोड़ बच्चों की लम्बाई अब भी उम्र के अनुसार कम है।

पौष्टिक भोजन अब भी बहुत महंगा
रिपोर्ट में यह भी देखा गया है कि पौष्टिक भोजन ख़रीदने में कितना ख़र्च आता है। इसका मतलब ऐसे स्थानीय खाद्य पदार्थों की न्यूनतम क़ीमत से है, जो किसी व्यक्ति की ऊर्जा और पोषण की अधिकतर ज़रूरतें पूरी कर सकें।

वर्ष 2025 में पौष्टिक आहार की औसत वैश्विक लागत बढ़कर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 4.28 क्रय शक्ति समता डॉलर हो गई। यह लागत 2021 में 3.44डॉलर और 2017 में 2.94 डॉलर थी।

फिर भी, पौष्टिक भोजन का ख़र्च न उठा पाने वाले लोगों की संख्या 2021 के 2 अरब 97 करोड़ से घटकर 2025 में 2 अरब 69 करोड़ हो गई। लेकिन दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थिति अब भी बहुत असमान है।

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