बारिश के दौरान दिन में सुस्ती और नींद महसूस होती है। धूप की कमी और नमी के साथ सर्केडियन रिद्म के बदलने से थकान लगातार बनी रहती है लेकिन इसकी ज़्यादती होने पर इसे महज़ मौसम का बदलाव मानकर नजरअंदाज कर देना भी थी नहीं।
बारिश का माहौल जैसे ही नमी का एहसास कराता है ठीक उसी समय सुस्ती भी मन में जगह बना लेती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव के चलते कम धूप, बढ़ी हुई नमी और ढर्रे से उतरी दिनचर्या से शारीरिक गतिविधियों पर कुछ ऐसा असर पड़ता है कि बारिश में सुस्ती और नींद आ ही जाती है।
इस संबंध में एक्सपर्ट कहते हैं कि मानसून के समय वातावरण में नमी बढ़ जाती है और धूप कमी के कारण कई लोगों की दिनचर्या और नींद के पैटर्न पर असर पड़ता है। बारिश के मौसम में जानलेवा गर्मी से राहत तो मिलती ही है, कई लोगों को इस दौरान सुबह उठने के बाद भी सुस्ती के साथ शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होती है।
इसी मौसम का असर यह होता है कि व्यक्ति सारा दिन उनींदापन महसूस करता है और काम पर फोकस करने में परेशानी होती है। इसकी एक ख़ास वजह यह है कि लगातार बादल से शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिद्म को प्रभावित करती है।
मानसून दिनों में धूप की कमी के चलते भी लोग सूर्य की रोशनी के संपर्क में कम आते हैं तो शरीर में विटामिन डी की कमी होना आम बात है। नतीजे में थकान के साथ कमजोरी और मांसपेशियों में दर्द जैसी समस्याएं का सामना करना पड़ सकता है।
वहीँ बारिश के मौसम में उमस के चलते भी शरीर को तापमान नियंत्रित करने में अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। यह भी सुस्ती और थकान की एक वजह हो सकती है। लेकिन अगर आपको लगता है कि यह थकान लगातार बनी हुई है तो इसे कटाई नज़रअंदाज़ मत करें और तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श लें।