टाइटन के बाद टाटा परिवार पर मल्टी-सीज़न सिरीज़ की तैयारी

मेड इन इंडिया: ए टाइटन स्टोरी की ज़बरदस्त कामयाबी के बाद मल्टी-सीज़न ड्रामा ‘द टाटाज़’ के बनने की खबर आ रही है। इसे टी-सिरीज़ फ़िल्म्स और ऑलमाइटी मोशन पिक्चर के सबसे बड़े प्रोजेक्ट के रूप में जाना जा रहा है।

बॉलीवुड हंगामा खबर के अनुसार, इस प्रेस्टीज इवेंट सिरीज़ को एक प्रीमियम मल्टी-सीज़न ड्रामा के तौर पर देखा जा रहा है। इसे गिरीश कुबेर की किताब, ‘द टाटाज़: हाउ ए फ़ैमिली बिल्ट ए बिज़नेस एंड ए नेशन’ से लिया गया है, जिसने प्रतिष्ठित ‘गाजा कैपिटल बिज़नेस बुक ऑफ़ द ईयर’ अवॉर्ड जीता था।

टाइटन के किस्से में भावुक और ऐतिहासिक महत्व को दिखाने स्क्रीनराइटर करण व्यास ने कुबेर की किताब को स्क्रीन पर लाने के लिए चुना गया है। यह प्रोजेक्ट व्यास को सिंगल-ब्रांड फोकस से हटाकर एक सदी से ज़्यादा के भारतीय इतिहास को दिखाने वाले बड़े ऐतिहासिक कैनवास पर लाती है।

टी-सिरीज़ फिल्म्स के प्रोड्यूसर भूषण कुमार कहते हैं, “कुछ परिवार बिज़नेस बनाते हैं। कुछ इंस्टीट्यूशन बनाते हैं। टाटा परिवार ने मॉडर्न इंडिया के आइडिया को बनाने में मदद की।

एक भव्य और कई पीढ़ियों की कहानी बार आधारित ‘द टाटाज़’ एक ऐसे परिवार के आर्किटेक्चर को दिखाएगी, जिसका कॉर्पोरेट एथोस, इंडस्ट्रियल ब्रेकथ्रू और समाज-सेवी संस्थाएँ मॉडर्न इंडिया के जन्म और विकास के साथ गहराई से जुड़ी हुई थीं।

कहानी को केवल कॉर्पोरेट बोर्डरूम तक सीमित न रखते हुए सिरीज़ दूरदर्शी नेताओं के किरदारों की एक गहरी और करीबी स्टडी के तौर पर प्रस्तुति का इरादा रखती है, जो बदलते देश के सामाजिक-राजनीतिक बदलावों के साथ अपने गहरे निजी विश्वास को साधने का फ़र्ज़ भी निभाते हैं।

टाटा की यह सिरीज़ इस वंश के चार अलग-अलग समय को स्ट्रक्चर के हिसाब से दिखाएगी, और यह भी बताएगी कि हर पीढ़ी ने भारतीय माहौल में बुनियादी पिलर्स को कैसे स्थापित किया।

ऑलमाइटी मोशन पिक्चर के को-फ़ाउंडर, प्रोड्यूसर प्रभलीन संधू इस पर कहते हैं कि “हमारा क्रिएटिव मैंडेट हमेशा से ऑथेंटिक, गहराई से जुड़ी भारतीय कहानियों और उनके पीछे के असाधारण लोगों को सपोर्ट करना रहा है। मेड इन इंडिया: ए टाइटन स्टोरी को मिले प्यार ने हमारे इस विश्वास को और मज़बूत किया कि ऑथेंटिक भारतीय कहानियाँ हर जगह ऑडियंस के साथ जुड़ सकती हैं। द टाटाज़ के साथ, हम उस विज़न को और भी बड़े कैनवस पर फैला रहे हैं। यह सिर्फ़ एक परिवार या बिज़नेस एम्पायर की कहानी नहीं है—यह उन आइडियाज़, वैल्यूज़ और इंस्टीट्यूशन्स की कहानी है जिन्होंने मॉडर्न इंडिया को आकार देने में मदद की। हम इस शानदार विरासत को स्क्रीन पर लाने का मौका पाकर सम्मानित और बहुत विनम्र महसूस कर रहे हैं।”

यह सिरीज़ जमशेदजी के भारत को तीन ज़रूरी एसेट्स देने के बेहतरीन राष्ट्रवादी विज़न को दिखाएगी। इसमें टाटा स्टील के ज़रिए इंडिपेंडेंट हेवी इंडस्ट्री (एशिया का पहला इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट स्थापित करना), 1903 में मशहूर ताज महल पैलेस होटल के ज़रिए देसी लग्ज़री हॉस्पिटैलिटी, और वर्ल्ड-क्लास साइंटिफिक रिसर्च, जिसने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस (IISc) का फ्रेमवर्क का जिक्र है।

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