डिजिटल पैनडेमिक यानि ‘डिजिटल महामारी’ जैसे मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों की तरफ से हाल ही में एक अहम रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट का विषय है- यानि जब डिजिटल सिस्टम नाकाम हो जाएँ हैं तो क्या हो सकता है।
जब डिजिटल सिस्टम नाकाम हो जाएँ हैं तो क्या हो सकता है (When digital systems fail: An expert report on the hidden risks of our digital world) विषय वाली रिपोर्ट को तैयार करने वाली एजेंसियों में एक आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए यूएन एजेंसी – UNDRR भी है।
इस एजेंसी के मुखिया यूएन महासचिव के विशेष प्रतिनिधि कमल किशोर का कहना है कि अब सवाल यह नहीं बचा है कि क्या कोई डिजिटल आपदा हो सकती है, सवाल ये है कि ऐसी विशाल नाकामी कभी भी घट सकती है।
इस रिपोर्ट को कुछ दिन पहले, अन्तरराष्ट्रीय दूरसंचार यूनियन (ITU) और UNDRR ने जारी किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर किसी भी इलाक़े में, दुनिया के किसी भी कोने में, डिजिटल ढाँचे को अगर भूकम्प, बाढ़ और ज्वालामुखी जैसी प्राकृतिक आपदाएँ प्रभावित करेंगी तो उससे होने वाला प्रभाव और नुक़सान केवल उसी जगह तक सीमित नहीं रहेगा। यह पूरी दुनिया में फैलेगा। क्योंकि हमारी दुनिया व समाज, इस 21वीं सदी एक दूसरे से गहराई के साथ जुड़े हुए हैं और परस्पर निर्भर हैं।
कमल किशोर के साथ इस विशेष बातचीत में यूएन न्यूज़ ने जानना चाहा कि ये रिपोर्ट दरअसल क्या कहती है, और इसे डिजिटल महामारी का उपनाम क्यों दिया गया है। इस इंटरव्यू में कमल किशोर बताते हैं कि 21वीं सदी में हमारा जो जीवन है, हमारे रहने का जो ढंग है, उसमें डिजिटल ढाँचे की बहुत ही बड़ी भूमिका है। उनके अनुसार, हम जो भी चीज़ें करते हैं, चाहे हम बैंकिंग करें या हम यात्रा करने के लिए ट्रेन या एटरलाइन के लिए अपने टिकट बुक करें, या चीज़ों की ख़रीदारी हो, स्टॉक मार्केट हो, हर एक चीज़ में डिजिटल ढाँचा बहुत अहम है।
एक उदहारण पसग करते हुए रिपोर्ट कहती है कि अगर किसी ऐसे देश में जहाँ बहुत तेज़ गर्मी पड़ रही हो और उसकी जह से वहाँ एक डेटा सेंटर को बन्द करना पड़े तो उसका ट्रैफ़िक किसी अन्य डेटा सेंटर की तरफ़ भेजा जाएगा। आगे रिपोर्ट कहती है कि हो सकता है उस डेटा सेंटर के पास इतना अतिरिक्त वज़न उठाने के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं हो। ऐसे में जिस देश का डेटा सेंटर बन्द हुआ है उसमें भी प्रभाव पड़ेगा और जिस देश के पास ये ट्रैफ़िक भेजा गया, वहाँ भी प्रभाव पड़ेगा।
एक अन्य उदाहरण का हवाला देते हुए कहा गया है कि दैनिक जीवन की बहुत सारी चीज़ें डिजिटल ढाँचे पर निर्भर हैं। मसलन ऑनलाइन ख़रीददारी में डिजिटल नाकामी से बहुत सारी चीज़ें प्रभावित होंगी।