कॉकरोच जनता पार्टी के बाद अब उसका घोषणापत्र सुर्ख़ियों में है

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्या कांत के युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने वाले विवादास्पद बयान के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ वजूद में आ गई है। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस दौरान कुछ बड़े चेहरों के इस पार्टी में जुड़ने से नया विवाद सामने आया है।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने भी अपना घोषणापत्र जारी किया है। पार्टी ने अपने एजेंडे में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही गई है। इसके अलावा पक्षपाती मीडिया और एंकरों के खिलाफ कार्रवाई, मुख्य न्यायाधीशों को रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा सीट न दिए जाने और राजनीतिक दलबदल पर सख्त रोक जैसी मांगें भी शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, लॉन्च होने के सिर्फ तीन दिनों के भीतर ही इस पार्टी से 70 हजार से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बनने से जहाँ एक तरफ राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज़ हो गई है वहीँ महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद के इस पार्टी में शामिल होने से बीजेपी ने नाराज़गी जताई है।

यह मामला पिछले सप्ताह उस समय तूल पकड़ा जब एक अदालती सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्या कांत ने कहा था कि कुछ युवा कॉकरोच जैसे हैं, जिन्हें नौकरी नहीं मिलती, पेशे में जगह नहीं बनती। वे मीडिया, सोशल मीडिया, आरटीआई एक्टिविस्ट या अन्य एक्टिविस्ट बनकर सब पर हमला करते हैं। जस्टिस सूर्या कांत के इस बयान की जमकर आलोचना हुई और यह किस्सा सोशल मीडिया में भी खूब चर्चित हुआ। कई लोगों ने इसे युवाओं के प्रति असहिष्णुता का प्रतीक बताया।

सूर्या कांत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर ‘कॉकरेच जनता पार्टी’ नाम का एक अनौपचारिक राजनीतिक अकाउंट सक्रिय हुआ। इसने खुद को युवाओं का, युवाओं द्वारा, युवाओं के लिए राजनीतिक मोर्चा- सेकुलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक – लेजी बताया। इस पार्टी के बायो में भी सीजेआई के बयान की पैरोडी थी।

जानकारी के मुताबिक़, लॉन्च के 24 घंटे में ही इसे 15,000 से ज्यादा फॉलोअर्स मिल गए और 17 मई की शाम छह बजे तक इसके फॉलोवर की संख्या 40,000 होने का दावा करने वाली पोस्ट भी साझा की गई।

कॉकरेच जनता पार्टी अपनी वेबसाइट पर खुद को बेरोजगार और आलसी लोगों का प्रतिनिधि बताती है। सदस्यता के लिए यह पार्टी किसी भी धर्म, जाति या लिंग की जांच से खुद को अलग रखते हुए इसके सदस्यता मानदंड को बड़े मजाकिया अंदाज़ में प्रस्तुत करती हैं। इसमें जबरन, पसंद या सिद्धांत से बेरोजगार, शारीरिक रूप से आलसी और दिन में कम से कम 11 घंटे ऑनलाइन और पेशेवर तरीके से रेंट (विरोध) करने की क्षमता की बात कही गई है।

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