इंसानी क़द को भी प्रभावित कर रहा है जलवायु परिवर्तन

बीबीसी की एक रिपोर्ट बताती है कि शोधकर्ताओं का अनुमान है कि जिन बच्चों को अपनी मां के गर्भ में रहते हुए, गर्भावस्था की हर तिमाही में 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान के उतार-चढ़ाव के साथ अधिक नमी का सामना करना पड़ा, उनकी लंबाई अपेक्षित से 13% कम होगी।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि डॉक्टर आंद्रीआ रोड्रिगेज़ मार्टिनेज़ ब्रिटेन के इम्पीरियल कॉलेज लंदन में जनसंख्या स्वास्थ्य की शोधकर्ता हैं। उन्होंने मानव लंबाई के रुझानों का विश्लेषण करने वाले कई शोध पत्र लिखे हैं। उन्हें आशंका है कि जलवायु परिवर्तन आधुनिक आबादी पर इसी तरह का दबाव डाल सकता है।

कैम्ब्रिज और टबिजेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का दावा बताता है कि तापमान में होने वाला इजाफा इंसानी क़द को भी प्रभावित कर रहा है। अपनी इस स्टडी के आधार पर वैज्ञानिक दावा करते हैं कि जलवायु परिवर्तन का सीधा संबंध इंसान के क़द से है

नेचर कम्युनिकेशन जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, शरीर तापमान के साथ खुद को एडजस्ट करता है। लगभग 11,650 साल पहले से ही इंसान का दिमाग सिकुड़ना शुरू हो गया था।

जलवायु परिवर्तन से होने वाले इस खतरे के प्रति ध्यान दिलाते हुए वैज्ञानिकों का कहना है, कि जलवायु परिवर्तन इंसान की लम्बाई और दिमाग को छोटा कर सकता है। उनके मुताबिक़, पिछले लाखों वर्षों में इसका असर इंसान की लम्बाई-चौड़ाई पर पड़ा है।

इस शोध के अनुसार, वैज्ञानिकों ने रिसर्च के लिए दुनियाभर से इंसानों के 300 से अधिक जीवाश्म का मुयायना किया। इस दौरान प्रत्येक शरीर और मस्तिष्क की जाँच से पता चला कि हर जीवाश्म ने जलवायु परिवर्तन की मार झेली है।

रिसर्स बताती है कि अफ्रीकी इंसानों की प्रजाति होमो की उत्पत्ति तीन लाख साल पहले हुई थी, जबकि ये इससे भी ज्यादा पुराने है। इंसानों की और प्रजातियां भी इसमें शामिल हुईं, जिनमें नियंडरथल्स, होमो इरेक्टरस, होमो हेबिलिस का नाम लिया जा सकता है।

इंसानों के विकास पर इसका अध्ययन बताता है कि शरीर और मस्तिष्क के आकार में बढ़ोत्तरी पाई गई। टीम का अनुमान है कि होमो हेबिलिस आज के इंसान के मुक़ाबले में पचास गुना अधिक वज़नी थे और इनका दिमाग तीन गुना तक बड़ा था।

इस रिसर्च के हवाले से कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर एंड्रिया मेनिका का कहना है कि रिसर्च यह संकेत देती है कि लाखों सालों से तापमान ही शरीर के आकार में बदलाव लाने वाला अहम फैक्टर रहा है। जिस तरह आज ठंडी जलवायु वाली जगहों पर इंसान का शरीर बढ़ता है और गर्म तापमान वाले क्षेत्र में रहने वालों का शरीर छोटा होता है, उसी प्रकार जलवायु परिवर्तन का इंसान के शरीर पर हमेशा से ही प्रभाव पड़ा है।

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