दुनिया भर में आज भी बाल विवाह एक चुनौती बना हुआ है

बाल विवाह यानी 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे का किसी वयस्क या किसी अन्य बच्चे के साथ औपचारिक विवाह अथवा अनौपचारिक संबंध है, और यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इस प्रथा के विरुद्ध कानून होने के बावजूद यह प्रथा व्यापक रूप से प्रचलित है।

दुनिया भर में आज भी बाल विवाह एक चुनौती बना हुआ है

दुनिया भर में हर एक मिनट में 28 लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में कर दी जाती है। यह कहना है सेव द चिल्ड्रेन का। वहीं यूनिसेफ के अनुसार भारत में प्रत्‍येक वर्ष, 18 साल से कम उम्र में करीब 15 लाख लड़कियों की शादी होती हैं। देस में 15 से 19 साल की उम्र की लगभग 16 प्रतिशत लड़कियां शादीशुदा हैं।

इस प्रथा को खत्म करने के लिए कई देशों में सख्त कानूनी और सामाजिक कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद स्थिति चिंताजनक है। भारत की बात करें तो आज विश्व स्तर पर सबसे अधिक बाल वधुओं वाला देश भारत ही है। हालाँकि बीते वर्षों में की गई कोशिशों से हालात में कुछ बदलाव भी आया है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों यानी साल 2019 से लेकर साल 2023 के बीच ‘बाल विवाह निषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006’ के तहत दर्ज मामलों की संख्या क्रमशः 523, 785, 1050, 1002 और 6038 है। इससे पता चलता है कि बाल विवाह के अधिकतर मामले कानून के दायरे में आ ही नहीं पाते हैं।

बाल विवाह को लेकर किए जाने वाले प्रयासों की बात करें तो इस वर्ष यानी 2026 में भारत में जागरूकता के जरिए बाल विवाह में 10 फीसदी की कमी लाने का लक्ष्य रखा है। साथ ही 2030 तक भारत को बाल विवाह से मुक्त करने का लक्ष्य है।

गौरतलब है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं-अभिशाप को खत्म करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals) 01 जनवरी 2016 को लागू किया था। इसके तहत 2030 तक बाल विवाह को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया। भारत में भी इसी संदर्भ में अभियान चलाया गया है।

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