आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से तैयार एक वीडियो इस समय भारत के बारे में एक भरम खबर फैला रहा है। इस फर्जी वीडियो से यह रहा है कि ‘भारत की संयुक्त राष्ट्र में बड़ी जीत हुई है। उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की सदस्यता मिल गई है और साथ में फुल वीटो पॉवर मिल गया है।’

जबकि सच्चाई यह है कि भारत के पास संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता या वीटो पावर नहीं है। पूरी तरह से प्रोपेगंडा वीडियो का ऑडियो भी एआई से तैयार किया गया है। जहाँ एक तरफ दावे के दौरान कई जगहों पर आवाज में उच्चारण बनावटी हैं वहीँ अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पूर्व राष्ट्रपति कहा जाना भी एक बड़ी तथ्यात्मक गलती है। दूसरी तरफ इस संबंध में किये गए प्रयासों पर नज़र डालें तो भारत एक अरसे से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की मांग करने के साथ सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता चाहता है।
इस फ़र्ज़ी वीडियो की मदद से सोशल मीडिया पर इस तरह के दावे किए जा रहे हैं जिसमें भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता मिलने की बात कही जा रही है। इस वीडियो में दूरदर्शन न्यूज के प्रधान संपादक भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता और पूर्ण वीटो पावर मिलने की बात कह रहे हैं। वीडियो में संपादक विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत का भी जिक्र है, जिसमें वह डोनाल्ड ट्रंप से कहते हैं कि भारत किसी के आदेश पर नहीं चलेगा। बेहद तेज़ी से वायरल इस वीडियो खबर लिखे जाने तक करीब 65 लाख व्यूज और 2.5 लाख से ज्यादा लाइक्स मिल चुके थे।
इस वीडियो क्लिप के मुताबिक़ अमरीका सहित मौजूदा स्थायी सदस्य देश, भारत को पूर्ण वीटो पावर के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने पर सहमत हुए हैं। हालाँकि इस बारे में जब ग्रोक से सवाल किया गया तो जवाब मिला कि भारत को अभी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थायी सदस्यता नहीं मिली है और न ही उसे वीटो पावर मिली है। हाल ही में कुछ वायरल वीडियो और पोस्ट्स (जैसे AI से एडिटेड क्लिप्स) दावा कर रहे हैं कि भारत को 154 देशों के समर्थन से स्थायी सदस्यता मिल गई है, लेकिन ये सभी झूठे हैं। कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। UNSC सुधार की चर्चा जारी है, लेकिन इसमें अभी कई वर्ष लग सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए UN की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
बताते चलें कि वर्तमान में यूएनएससी के स्थायी सदस्यों की संख्या केवल पांच हैं। इनमे अमरीका के अलावा रूस, चीन, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। इन पांच देशों को ही वीटो पावर के उपयोग की शक्ति मिली हुई है। यानी केवल यही पांच देश यूएन में किसी प्रस्ताव को रोकने की हैसियत रखते हैं।
गौरतलब है कि यूएन में इसके अलावा दस ऐसे अस्थायी सदस्य होते हैं, जो महासभा द्वारा हर दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। भारत ने यूएनएससी अभी तक आठ बार अस्थायी सदस्य के रूप में अपनी सेवा दे चुका है, जिसमें सबसे हालिया कार्यकाल 2021-22 का था।
