ओज़ोन परत की मरम्मत एकजुट कार्रवाई की मिसाल है-युनाइटेड नेशन

ओज़ोन परत पृथ्वी की रखवाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र हर वर्ष 16 सितम्बर को इस अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की कामयाबी का जश्न मनाता है और इस तरफ़ ध्यान आकर्षित करता है कि पृथ्वी की रक्षा के लिए और क्या किया जा सकता है।

ओज़ोन परत की मरम्मत एकजुट कार्रवाई की मिसाल है-युनाइटेड नेशन

पृथ्वी के इर्द-गिर्द घेरा बनाने वाली ओज़ोन दरअसल, गैस की एक ऐसी अदृश्य परत है जो, उसे सूर्य की पराबैंगनी किरणों (UV Rays) से धरतीवासियों की रक्षा करती है।पिछली शताब्दी में, वैज्ञानिकों ने ओज़ोन परत में कमज़ोरी की चिन्ताजनक वास्तविकता की पुष्टि की थी।

ओज़ोन को नुक़सान पहुँचाने वाले पदार्थों में सीएफ़सी या क्लोरोफ़्लूरोकार्बन शामिल थे, जो 1980 के दशक के मध्य में, एयर कंडीशनर, फ़्रिज और ‘एरोसोल कैन’ जैसे रोज़मर्रा के उत्पादों में आम तौर पर पाए जाते थे।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एतोनियो गुटेरेश ने इस वर्ष के विश्व ओज़ोन दिवस पर अपने सन्देश में कहा, “विएना कन्वेंशन और उसका मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, बहुपक्षीय सफलता में एक मील का पत्थर बन गया है।” आगे उन्होंने कहा- “आज, ओज़ोन परत ठीक हो रही है।”

इस जानकारी से वैश्विक कार्रवाई के ज़रिए देशों ने यह महसूस किया कि हानिकारक पराबैंगनी विकिरण, सम्भावित रूप से क्षतिग्रस्त ओज़ोन परत में से होकर, वायुमंडल में प्रवेश कर रहा था। ऐसे में देशों ने लोगों और ग्रह की सुरक्षा के लिए, 1985 में विएना कन्वेंशन के तहत आवश्यक क़दम उठाने की प्रतिबद्धता जताई।

ओज़ोन परत के संरक्षण के लिए विएना कन्वेंशन को 22 मार्च 1985 को, 28 देशों ने अपनाया था और उस पर हस्ताक्षर किए थे। यही विएना कन्वेंशन है। इस कन्वेंशन के ज़रिए, नाज़ुक ओज़ोन परत के संरक्षण पर सार्वभौमिक सहयोग को औपचारिक रूप दिया गया था। इस बारे में यूएन प्रमुख ने कहा कि देश, चालीस साल पहले, ओज़ोन परत की रक्षा के लिए पहला क़दम उठाने की ख़ातिर एकजुट हुए थे।

यूएन पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की कार्यकारी निदेशक इन्गेर ऐंडरसन ने इस दिवस के अवसर पर एक वीडियो सन्देश में ज़ोर दिया है कि इन सन्धियों के तहत कार्रवाई के ही सकारात्मक परिणाम हैं कि “ओज़ोन परत को नुक़सान पहुँचाने वाले पदार्थों का अब लगभग उन्मूलन हो चुका है और ओज़ोन परत में छेद कम हो रहा है।”

इन्गेंर ऐंडरसन ने आगे कहा की यह बहुपक्षवाद की सफलता की मिसाल है। दुनिया भर के देश और व्यवसाय, वैज्ञानिकों की चेतावनी के बादएकजुट हुए और पृथ्वी की रक्षा की ख़ातिर क़दम उठाए।

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