2025-2026 वित्तीय वर्ष के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यूएन शान्तिरक्षा अभियानों की खातिर 5 अरब 38 करोड़ डॉलर के बजट को मंज़ूरी दी है। यह पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम है।

धन उपलब्धता सम्बन्धी चुनौतियों के बारे में चेतावनियों के बीच सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने कई सप्ताह की बातचीत के बाद सोमवार को इस बजट को स्वीकृत किया। पिछले साल शान्तिरक्षा बजट 14 अभियानों के लिए $5.59 अरब था, जिससे पता चलता है कि 2025-2026 में कुछ कमी हुई है।
यूएन शान्तिरक्षा मिशन
संयुक्त राष्ट्र के शान्तिरक्षा अभियान इस विश्व संगठन की सबसे प्रतिष्ठित गतिविधियों में से एक है, जिनमें अफ़्रीका, मध्य पूर्व और योरोप में लगभग 70 हज़ार सैन्य, पुलिस और नागरिक कर्मी तैनात हैं।
यूएन शान्तिरक्षा बजट चक्र हर साल जुलाई से अगले साल जन तक चलता है, जबकि संगठन का नियमित बजट जनवरी से दिसम्बर तक चलता है। संयुक्त राष्ट्र का मुख्य बजट, इस संगठन के मुख्य कार्यक्रमों के लिए धन उपलब्ध कराता है. इनमें मानवाधिकार, विकास, राजनैतिक मामले, संचार और क्षेत्रीय सहयोग शामिल हैं।
प्रशासनिक और बजट संबंधी अपनी पाँचवीं समिति में यूएन महासभा ने सिफ़ारिश पर कार्य करते हुए 12 मिशनों की पुष्टि की। इनके अलावा एंटेबे (युगांडा) और ब्रिंडिसि (इटली) में रसद केन्द्रों और शान्तिरक्षा के लिए सहायता खाते के लिए बजट को मंज़ूरी दी।
इन शान्तिरक्षा अभियानों के बजट, बिना मतदान के ही स्वीकृत किए गए। लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अन्तरिम बल (UNIFIL) पर प्रस्ताव को 147 वोटों के पक्ष में और 3 के ख़िलाफ़ में पड़ने के साथ स्वीकृत किया गया। अर्जेंटीना, इसरायल और संयुक्त राज्य अमरीका ने इसके विरोध में मतदान किया और पैरागवाय ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
संयुक्त राष्ट्र नियंत्रक चन्द्रमौली रामनाथन ने इस बजट पर समझौते के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र में नक़दी की कमी के बारे में एक गम्भीर व नाज़ुक तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा- “आप किसी तरह साल में तीन बार आम सहमति बनाने में कामयाब होते हैं। लेकिन मैं केवल यही चाहता हूँ कि आप संयुक्त राष्ट्र की अन्तर्निहित समस्याओं में से एक को हल करने के लिए थोड़ा और आगे बढ़ें, जो हमें 80 वर्षों से परेशान कर रही है।”
उन्होंने यह बात पिछले सप्ताह पाँचवीं समिति में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के दौरान कही। उन्होंने बताया कि स्वीकृत बजट किस तरह, अक्सर नक़दी की कमी के कारण कमज़ोर हो जाते हैं, जिससे ख़र्च में 10, 15 या 20 प्रतिशत की कटौती करने के लिए तत्काल निर्देश देने पड़ते हैं।















