विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि पृथ्वी के बढ़ते तापमान के रुझान में कमी आने के कोई संकेत नज़र नहीं आ रहे है।

वैश्विक जलवायु पर वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाईज़ेशन अपडेट में चेतावनी दी गई है कि 2015 से 2025 के समय को अब तक की सबसे गर्म अवधि के रूप में दर्ज किया गया है। तापमान सम्बन्धी रिकॉर्ड अबसे 176 साल पहले रखना शुरू किया गया था और उसके बाद से यह अब तक का सबसे गर्म दशक है।
यूएन मौसम विज्ञान एजेंसी की महासचिव सेलेस्ते साउलो का कहना है कि ऊँचे तापमान का अभूतपूर्व रुझान और उसके साथ पिछले वर्ष ग्रीनहाउस गैस के स्तर में रिकॉर्ड वृद्धि से स्पष्ट है कि अगले कुछ वर्षों में वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना लगभग असम्भव होगा और अस्थाई तौर पर हम इस सीमा को पार कर लेंगे।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन की ओर से ‘वैश्विक जलवायु स्थिति अपडेट 2025’ की रिपोर्ट जारी की गई है। रिपोर्ट बताती है कि जनवरी से अगस्त 2025 तक सतह के निकट का औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक औसत से 1.42 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। इससे भविष्य में कई तरह के खतरे की आशंका है।
हालांकि, उन्होंने बताया कि तापमान में वृद्धि को इस सदी के अन्त तक फिर से इस दहलीज के नीचे लाना सम्भव है। यूएन एजेंसी की रिपोर्ट में जलवायु प्रभावों की चिन्ताजनक तस्वीर को उकेरा गया है। आर्कटिक क्षेत्र में समुद्र पर जमे हुए पानी की चादर, सर्दी के मौसम में अपने निम्नतम स्तर पर है, जबकि अंटार्कटिक में यह औसत से कम है।
वहीं, वैश्विक समुद्री जलस्तर में वृद्धि हो रही है और 1990 के दशक की तुलना में यह दोगुनी रफ़्तार से हो रहा है, जिसकी वजह महासागर का बढ़ता तापमान और जमे हुए पानी की चादर का पिघलना है।
इस दौरान घटने वाली चरम मौसम घटनाओं के चलते विनाशकारी बाढ़, तूफ़ान, ताप लहरों, जंगलों में आग आदि से खाद्य प्रणालियों में व्यवधान आया है। भारी संख्या में समुदाय विस्थापित होने के लिए मजबूर हैं और अनेक क्षेत्रों में आर्थिक विकास में अवरोध पैदा हो रहे हैं।












