दुनियाभर में साल 2021 में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या 11.9 लाख थी। इनमें सड़कों पर अपनी जान गवांने वालों में 28 फ़ीसदी यानि लगभग 3.30 लाख लोग दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से थे। इन चिन्ताजनक आँकड़े को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की रोकथाम के लिए ज़रूरी क़दम उठाने की अपील की है।
भारत की राजधानी नई दिल्ली में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में सड़क सुरक्षा पर चर्चा के लिए एक तीन-दिवसीय बैठक हो रही है। इस बैठक में स्वास्थ्य व परिवहन मंत्रालयों, सड़क सुरक्षा सम्बन्धित एजेंसियों, यातायात पुलिस, यूएन एजेंसियों, नागरिक समाज संगठनों और युवा प्रतिनिधियों समेत विभिन्न साझीदार हिस्सा ले रहे हैं।
एक अनुमान के अनुसार, सड़क हादसों में दर्ज कुल मौतों में 46 फ़ीसदी मोटर चालित दोपहिया और तिपहिया वाहनों के सवार होते हैं। पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों को भी शामिल करें, तो ये समूह सड़क हादसों में होने वाली कुल मौतों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा हैं।
यूएन रिपोर्ट के मुताबिक़, क़रीब 92 फ़ीसदी मौतें, निम्न- और मध्य-आय वाले देशों में होती हैं। सड़क हादसे पाँच से 29 वर्ष की उम्र के बच्चों और युवाओं की मौत का सबसे बड़ा कारण हैं, और इसकी रोकथाम के लिए प्रयास सुस्त गति से आगे बढ़ रहे हैं।
रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि वर्ष 2010 से 2021 के बीच दक्षिण-पूर्व एशिया में सड़क हादसों से होने वाली मौतों में महज़ दो फ़ीसदी कमी आई, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी पाँच फ़ीसदी रही।
यूएन स्वास्थ्य संगठन के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के कार्यवाहक प्रमुख डॉक्टर नीलेश बुद्ध का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली अनेक मौतों को रोका जा सकता है। डॉक्टर नीलेश बुद्ध का कहना है कि स्कूल जाता बच्चा, सड़क पार करता कोई विकलांग व्यक्ति या काम पर जाता मोटरसाइकिल सवार, सभी को सुरक्षित सड़कों की ज़रूरत है। उनका कहना है कि सड़कें, वाहन और परिवहन प्रणालियाँ बनाते समय हर व्यक्ति की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने देशों से अपने संकल्पों को ठोस कार्रवाई में बदलने की अपील करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को स्कूल, काम या रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए सुरक्षित यात्रा करने का अवसर मिलना चाहिए।
साथ ही वाहनों की गति सीमा का बेहतर पालन, सड़क सुरक्षा के लिए सख़्त यातायात नियम तथा सीट बेल्ट पहनने, हेलमेट लगाने पर ज़ोर, नशे में या फ़ोन का इस्तेमाल करते हुए गाड़ी चलाने पर लगाम की बात भी उन्होंने कही।
सड़क हादसे से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण उपाय भी सामने रखे गए। इनमें-
पैदल यात्रियों व साइकिल सवारों के लिए सुविधा (फ़ुटपाथ, साइकिल लेन, सड़क पार करने का सुरक्षित ज़रिया) तथा
हादसों के बाद जल्द से जल्द गुणवत्तापूर्ण आपातकालीन चिकित्सा सेवा की सुलभता
ठोस निर्णयों के लिए विश्वसनीय आँकड़ों की उपलब्धता, पर्याप्त स्तर पर वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था की बात की गई।
गौरतलब है कि इससे पहले, जुलाई 2026 में सड़क सुरक्षा पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र की उच्चस्तरीय बैठक में वर्ष 2030 तक सड़क हादसों में होने वाली मौतों और घायलों की संख्या में कम से कम 50 फ़ीसदी तक कमी लाने का लक्ष्य दोहराया गया था।
डॉक्टर नीलेश बुद्ध ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देशों को स्पष्ट प्राथमिकताएँ तय करनी होंगी, ज़िम्मेदारियाँ बाँटनी होंगी और प्रगति की नियमित निगरानी करनी होगी। “सड़क सुरक्षा एक साझा ज़िम्मेदारी है, जिसके लिए स्पष्ट जवाबदेही ज़रूरी है।”