भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड स्नो लेपर्ड सफारी लद्दाख में शुरू हुई

भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड स्नो लेपर्ड वाइल्डलाइफ सफारी लद्दाख में शुरू हो गई। इससे पर्यटकों को इस इलाके में पाए जाने वाले दुर्लभ स्नो लेपर्ड और ऊंचाई वाले इलाकों के खास वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अनोखा मौका मिलेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, लद्दाख के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख स्नो लेपर्ड सफारी के लिए छह गाड़ियों को हरी झंडी दिखाई। यह सफारी ‘स्नो लेपर्ड एंड हाई-एल्टीट्यूड नेचर कंजर्वेशन’ (SHAN) सोसाइटी द्वारा लद्दाख के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण विभाग के सहयोग से आयोजित की जा रही है।

बताते चलें कि लद्दाख प्रशासन ने इस साल 5 अगस्त को लद्दाख में वाइल्डलाइफ सफारी शुरू करने का फैसला किया था। शुरुआत में, रुम्बक, शांग और उले जैसे चिन्हित इलाकों में छह गाड़ियां चलेंगी, जो स्नो लेपर्ड के अक्सर दिखाई देने के लिए जाने जाते हैं। यह पहल पर्यटकों को लद्दाख के खास पेड़-पौधों और जानवरों को देखने का एक अनोखा और गाइडेड मौका देगी।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इसके लिए खास तौर पर डिज़ाइन की गई खुली गाड़ियों, प्रशिक्षित स्थानीय ड्राइवरों और वाइल्डलाइफ गाइडों को तैनात किया जाएगा। साथ ही, हेमिस नेशनल पार्क, चांगथांग और काराकोरम वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के साथ-साथ नुब्रा, ज़ंस्कार, शाम, करगिल और द्रास में भी उपयुक्त रास्ते तय किए जा रहे हैं।

रिपोर्ट्स के हवाले से अधिकारियों से मिली जानकारी से पता चला है कि इस पहल का मकसद गैर-कानूनी ऑफ-रोडिंग और ऐसी दूसरी गतिविधियों को रोकना है जिनसे वन्यजीवों को परेशानी हो सकती है, साथ ही टिकाऊ और ज़िम्मेदार इको-टूरिज़्म को बढ़ावा देना है।

भारत की सबसे ज़्यादा स्नो लेपर्ड आबादी लद्दाख में है। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि देश के अनुमानित 718 स्नो लेपर्ड में से 477 यहीं पाए जाते हैं। इसके अलावा इस इलाके में स्तनधारी जीवों की 38 से ज़्यादा प्रजातियां, पक्षियों की 340 प्रजातियां और लगभग 1,800 संवहनी पौधों (vascular plants) की प्रजातियां पाई जाती हैं, जो इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण हाई-एल्टीट्यूड जैव-विविधता वाले इलाकों में से एक बनाती हैं।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस पहल के तहत, 20 स्थानीय युवाओं को पक्षियों को देखने, उनकी पहचान करने और उन्हें खोजने (बर्ड-स्पॉटिंग) की ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्हें दूरबीन (बाइनोक्युलर) दी जाएगी और मुख्य जगहों पर पक्षियों को देखने के लिए खास जगहें (बर्डवॉचिंग हाइड्स) बनाई जाएंगी।

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