लखनऊ मेट्रो का काम विस्तार के साथ आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में यह प्रोजेक्ट 11.165 किलोमीटर लंबे नए कॉरिडोर के साथ 12 स्टेशन का निर्माण कर रहा है। मेट्रो के विस्तार से व्यस्त रास्तों पर ट्रैफ़िक कम होने के साथ उम्मीद है कि नया कॉरिडोर पुराने लखनऊ के भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सड़कों पर यात्रा का दबाव कम करेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबि, लखनऊ मेट्रो फ़ेज़ 1B के तहत 12 मेट्रो स्टेशन शामिल होंगे। इनमे सात अंडरग्राउंड और पाँच एलिवेटेड यानी ऊपर बने हुए होंगे। इस 11.165 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट की मंज़ूरी अगस्त 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी थी। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 5,801 करोड़ आंकी गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, लखनऊ मेट्रो फ़ेज़ 1B के शुरू होने के बाद शहर का सक्रिय मेट्रो नेटवर्क लगभग 34 किलोमीटर तक हो जाने की उम्मीद है। इस विस्तार से मेट्रो की सुविधा पुराने लखनऊ के अहम हिस्सों, जैसे अमीनाबाद, यहियागंज, पांडेगंज और चौक तक पहुँचेगी।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार, फ़ेज़ 1B के तहत सबसे नया डेवलपमेंट इसके अंडरग्राउंड सेक्शन के लिए एक बड़ा कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्ट है। हाल ही में, चारबाग मेट्रो स्टेशन से चौक मेट्रो स्टेशन तक लगभग 6.70 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन के डिज़ाइन और कंस्ट्रक्शन के लिए 1,383.30 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के लिए ‘एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर’ (Afcons Infrastructure) सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनकर सामने आई है। यह कॉन्ट्रैक्ट 5 अक्टूबर, 2026 का है और इसे पूरा करने की अवधि 1,095 दिन है।
इस काम में सात अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों का निर्माण और उससे जुड़े सिविल कार्य शामिल हैं। यह सेक्शन घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुज़रेगा और फ़ेज़ 1B के अंडरग्राउंड हिस्से का एक अहम हिस्सा बनेगा।
इस प्रोजेक्ट से लखनऊ के कुछ सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाकों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा और बेहतर होने होने की उम्मीद है। साथ ही शहर के व्यस्त कमर्शियल, हेल्थकेयर और ट्रांसपोर्ट हब तक भी पहुंच बेहतर हो सकेगी।
यह प्रोजेक्ट शहर में घूमने-फिरने के लिए निवासियों और आने-जाने वालों को एक बेहतर विकल्प देगा, खासकर उन रास्तों पर जहाँ अक्सर सड़क पर भारी ट्रैफिक रहता है।
इस विस्तार से शहर के उन हिस्सों में रोज़ाना आना-जाना आसान होने की उम्मीद है जहाँ बाज़ार, हेल्थकेयर सुविधाओं, रेलवे स्टेशनों, हेरिटेज साइट्स और दूसरी ज़रूरी जगहों की वजह से लोगों की भारी भीड़ रहती है।
मेट्रो सुविधा से जुड़े मुख्य इलाक़ों की बात करें तो बनने वाला कॉरिडोर अमीनाबाद, यहियागंज, पांडेगंज और चौक जैसे बड़े कमर्शियल सेंटर्स के पास मेट्रो सर्विस पहुंचाएगा। इन इलाकों में दिन भर खरीदार, काम करने वाले लोग और स्थानीय निवासी आते-जाते रहते हैं, जिससे ये नए नेटवर्क पर अहम जगहें बन जाती हैं।
इस कॉरिडोर पर एक और अहम जगह किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज है। मेट्रो से मरीज़ों, उनके साथ आने वाले लोगों, स्टूडेंट्स और स्टाफ़ के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों से इस हेल्थकेयर कॉम्प्लेक्स तक पहुँचना आसान हो सकता है।
फ़ेज़ 1B से लोकल बिज़नेस को मदद मिलेगी। इसकी बदौलत नए स्टेशनों से कमर्शियल इलाकों में ज़्यादा लोग आ सकेंगे, क्योंकि ग्राहकों और कर्मचारियों के लिए वहाँ पहुँचना आसान हो जाएगा।
इस विस्तार से स्टेशन के आस-पास के इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी को भी बढ़ावा मिल सकता है और शहर के उन हिस्सों तक पहुँच आसान हो सकती है जहाँ पहले तेज़-रफ़्तार ट्रांसपोर्ट के कम ऑप्शन थे।
यात्रियों के लिए, इससे मेट्रो और दूसरे पब्लिक ट्रांसपोर्ट साधनों के बीच बदलना आसान हो सकता है। इससे लोग शुरू से आखिर तक सड़क परिवहन पर निर्भर रहने के बजाय अपनी यात्रा के एक हिस्से के लिए मेट्रो का इस्तेमाल कर सकेंगे।