एशियन गेम्स में पहली बार हिस्सा ले रहीं नीरू ने महिलाओं के ट्रैप व्यक्तिगत इवेंट में 30 में से 28 हिट्स के शानदार प्रदर्शन के साथ गोल्ड मेडल जीता है और नया एशियाई रिकॉर्ड व एशियन गेम्स रिकॉर्ड बनाया है। इस जीत के साथ, नीरू एशियन गेम्स में महिलाओं के ट्रैप इवेंट में व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय शूटर बन गई हैं।
विमेंस ट्रैप स्पर्धा में निशानेबाज नीरू ढांडा ने भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने के साथ फाइनल में 28 अंक हासिल करते हुए नया एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया है। मौजूदा एशियन गेम्स में भारत अब ग्यारहवें स्थान पर है। एशियन गेम्स 2026 में भारत के पदकों की संख्या अब 47 हो गई है। इनमें 5 गोल्ड, 21 सिल्वर और 21 ब्रॉन्ज हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, शूटिंग में विमेंस ट्रैप टीम ने सिल्वर मेडल जीता। नीरू ढांडा, आशिमा अहलावत और मनीषा कीर की तिकड़ी ने भारत को इस सफलता का हक़दार बनाया।
एशियन गेम्स की विमेंस ट्रैप स्पर्धा में हरियाणा के जींद की निशानेबाज नीरू ढांडा ने देश को पांचवां गोल्ड मेडल दिलाया। नीरू का यह सफर संघर्ष की कई पगडंडियों से होकर गुज़रा है। आइए देखते हैं नीरू के इस सफर को-
हरियाणा के जींद जिले के संगतपुरा गांव से आने वाली नीरू का जन्म एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में हुआ। उनकी माँ एक घरेलु महिला हैं। नीरू का परिवार बाद में मध्य प्रदेश के शिवपुरी में रहने के लिए आ गया।
नीरू भारतीय सेना के कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस में नायब सूबेदार के पद पर है। वह सेना की प्रतिष्ठित ‘आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट’ (AMU), महू (मध्य प्रदेश) में प्रशिक्षण लेती हैं।
एशियाई खेल 2018 के समय नीरू को उनके ममेरे भाई लक्ष्य शेरोन से खेलों की प्रेरणा मिली। भाई ने ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक जीता था और इससे प्रभावित होकर नीरू ने निशानेबाजी को अपनाया।
अपनी फॉर्मल ट्रेनिंग से पहले नीरू ने परिवार की पुरानी दोनाली बंदूक से टीन के डिब्बों पर निशाना साधकर इसका अभ्यास शुरू किया था। बाद में उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी में दाखिला लिया, जहां से उनके पेशेवर करियर की शुरुआत हुई।