एआई सुरक्षा का मतलब केवल मानवता को विनाश से बचाना नहीं बल्कि पीढ़ियों की रक्षा करना भी है: वोल्कर टर्क

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर लिखे अपने पत्र में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने लिखा, ‘जो पीढ़ी अब वयस्क हो रही है, उसे आज लिए जा रहे फ़ैसलों के नतीजे विरासत में मिलेंगे, जबकि इन फ़ैसलों में उसकी कोई भूमिका नहीं है। इसलिए ज़रूरी है कि ये फ़ैसले पारदर्शी ढंग से और उसके अधिकारों को ध्यान में रखते हुए लिए जाएँ।’



आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होने वाले नुक़सान को रोकने और स्वायत्त प्रणालियों को मानवीय सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने से बचाने के लिए सख़्त नियमन ज़रूरी है। यह मानना है संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क का।

वोल्कर टर्क ने इस प्रस्ताव और इंडस्ट्री के सेल्फ रेगुलेशन के प्रयासों का स्वागत किया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि सरकारों को भी एआई के नियमन के लिए तत्काल क़दम उठाने होंगे। उनके मुताबिक़, एआई सुरक्षा का मतलब केवल मानवता को विनाश से बचाना नहीं है, बल्कि लोगों, समुदायों, संस्थानों और भावी पीढ़ियों की रक्षा करना भी है।

वोल्कर टर्क के मुताबिक़, बेहद एडवांस एआई प्रणालियाँ विकसित करने वाली कम्पनियों के लिए केवल स्वैच्छिक नियम पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने एक खुले पत्र में लिखा, ‘लगातार अधिक शक्तिशाली एआई विकसित करने की मौजूदा दौड़, हमारे जीवन के हर पहलू के लिए कहीं बड़े अस्तित्वगत ख़तरे पैदा कर रही है।’

मानवाधिकार उच्चायुक्त का यह बयान Anthropic के एक पूर्व शोधकर्ता के इस्तीफ़े के छह दिन बाद आया है। गौरतलब है कि क्लॉड चैटबॉट विकसित करने वाली इस कम्पनी के शोधकर्ता ने चेतावनी दी थी कि एआई बनाने वाले लोगों को भी यह आशंका है कि इस दशक के अन्त तक यह तकनीक हम सभी की जान ले सकती है।

यूएन रिपोर्ट के मुताबिक़,जेकब कॉक्सन के इस्तीफ़े और OpenAI व Anthropic से जुड़ी हालिया घटनाओं ने इस बहस को और तेज़ कर दिया है कि सरकारों को एआई का नियमन कितना सख़्त करना चाहिए। दोनों कम्पनियों ने बताया था कि उनके कुछ एआई मॉडल परीक्षण के दौरान तय सीमाओं से बाहर निकल गए थे।

इस बीच वोल्कर टर्क ने सदस्य देशों से बहुपक्षीय संस्थाओं के ज़रिए मिलकर ये शासन व्यवस्था पर वैश्विक सहमति बनाने और इससे जुड़े जोखिमों के बीच मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया।

उन्होंने ऐसे देशों से एआई नियमन कड़ा करने का आहवान किया, जहाँ उन्नत एआई विकसित करने वाली प्रमुख कम्पनियाँ स्थित हैं। साथ ही उन्होंने गंभीर घटनाओं की अनिवार्य रिपोर्टिंग सहित एआई क्षमताओं की स्वतंत्र जाँच और मानवाधिकारों पर इसके प्रभाव के आकलन जैसे उपाय भी सुझाए।

‘एआई की रफ़्तार पर नियंत्रण’
शनिवार को एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने We Must Pace the Frontier शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया। इसमें उन्होंने कहा कि कम्पनियों कोएआई का विकास जारी रखना चाहिए लेकिन उसकी रफ़्तार ऐसी हो कि पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जा सकें और स्वायत्त एआई प्रणालियाँ नियंत्रण से बाहर न हों।

डारियो अमोदेई के इस प्रस्ताव का OpenAI सहित Google और xAI के प्रमुखों ने भी समर्थन किया। इसमें एआई मॉडलों का स्वतंत्र मूल्यांकन, एआई कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय और सरकारों के बीच अधिक सहयोग की बात कही गई है।

सुरक्षा से जुड़े उपाय अहम पर बात रखते हुए वोल्कर टर्क ने कहा, ‘जिन देशों में प्रमुख एआई कम्पनियाँ हैं, उनकी ज़िम्मेदारी है कि वे इन्हें जवाबदेह बनाएँ और ज़िम्मेदारी से काम करने के लिए बाध्य करें।’”

आगे उन्होंने चीन और अमरीका के हवाले से कहा कि ये देश एआई विकास में सबसे आगे हैं, इसलिए दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा को ख़तरनाक होड़ में बदलने से रोकने के लिए साझा अन्तरराष्ट्रीय मानकों और नीतिगत तालमेल की ज़रूरत है।

उन्होंने दोनों देशों को अपने दृष्टिकोण में तालमेल बिठाने की बात भी कही। वोल्कर टर्क के अनुसार, एआई से जुड़े जोखिमों और उसके नियमन का आकलन मुख्य रूप से इस आधार पर किया जाना चाहिए कि उसका मानवाधिकारों पर क्या असर पड़ता है।

वोल्कर टर्क ने उद्योग जगत की इस दलील को ख़ारिज किया कि एआई सुरक्षा उपाय, नवाचार की रफ़्तार धीमी करते हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के नाम पर किसी को भी अपने मानवाधिकारों से समझौता करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

उनके अनुसार, अनियंत्रित एआई विकास से जीवन, भोजन, निजता, स्वास्थ्य और सुरक्षा के अधिकारों पर ख़तरा बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एआई का इस्तेमाल दुष्प्रचार एवं असमान स्वचालन को बढ़ाने में होगा या जलवायु संकट से निपटने व बीमारियों के इलाज में – यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कम्पनियाँ और सरकारें इस “निर्णायक मोड़” पर क्या फ़ैसले लेती हैं।

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