दुनिया को अब भी तबाही के कगार से वापस लाया जा सकता है: एंतोनियो गुटेरेश

एक बार फिर से रिकॉर्ड गर्मी, जानलेवा बाढ़ और चरम मौसम की घटनाएँ दुनिया को गहराते जलवायु संकट की चेतावनी दे रही हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि वैश्विक तापमान जल्द ही सुरक्षित सीमा को पार कर सकता है। साथ ही रिपोर्ट यह भी कहती है कि तेज़ और निर्णायक जलवायु कार्रवाई से अब भी विनाशकारी नतीजों को टाला जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की नई रिपोर्ट बताती है कि दुनिया अपने लक्ष्य से भटक रही है। संयुक्त राष्ट्र की इस नई रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर नज़र डालें तो यह जानकारी सामने आती है-
वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने के लिए तेज़ और सामूहिक कार्रवाई ज़रूरी है।
मीथेन उत्सर्जन में कटौती, भूमि, वनों एवं महासागरों की रक्षा और जीवाश्म ईंधनों से तेज़ी से दूरी बनाकर मौजूदा रुझान को बदला जा सकता है।
तापमान में हर अतिरिक्त बढ़ोत्तरी से जान-माल का नुक़सान बढ़ेगा, आजीविकाएँ प्रभावित होंगी, असमानता गहराएगी और पारिस्थितिकी तंत्रों को स्थाई क्षति का ख़तरा बढ़ेगा।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने याद दिलाया कि जलवायु परिवर्तन पर ऐतिहासिक 2015 पेरिस समझौते के तहत विश्व नेताओं ने, वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5°C तक सीमित रखने का संकल्प लिया था।

वैज्ञानिकों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के सबसे विनाशकारी प्रभावों से बचने के लिए इस सीमा के भीतर रहना बेहद अहम है। महासचिव गुटेरेश ने हाल के महीनों में उत्तरी गोलार्द्ध में भीषण गर्मी, जंगल की आग और जानलेवा बाढ़ ने आने वाले जलवायु ख़तरों की चेतावनी दी है।

महासचिव गुटेरेश ने जोर देते हुए कहा, ‘1.5 डिग्री के लिए लड़ाई, मानवता के लिए लड़ाई है।’ साथ ही उन्होंने आगाह किया, ‘अगले कुछ वर्षों में ही वैश्विक तापमान 1.5°C की सीमा को पार कर सकता है।’

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की प्रमुख इन्गेर ऐंडरसन ने आगाह किया कि यदि वैश्विक तापमान लगातार 1.5°C से ऊपर बना रहता है, तो इसके गम्भीर नतीजे होंगे। उन्होंने कहा, ‘दुनिया भर में चरम तापलहरें पहले ही स्पष्ट कर रही हैं कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अधिक तेज़, गम्भीर और लम्बे समय तक रहने वाले होंगे। इससे अधिक लोगों की जान जाएगी और जनजीवन पर गहरा असर पड़ेगा।’

उन्होंने कहा, ‘अब जलवायु कार्रवाई तेज़ करने का समय है। हम सही राह पर लौट सकते हैं और हमें ऐसा करना ही होगा। इसके लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती, जलवायु सहनसक्षमता और अनुकूलन को मज़बूत करना तथा यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि तापमान 1.5°C की सीमा से जितना सम्भव हो, उतना कम और कम समय के लिए ही ऊपर रहे।’

‘समाधान मौजूद हैं’
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि तेज़ जलवायु कार्रवाई से दुनिया को अब भी तबाही के कगार से वापस लाया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘हम इस सदी के अन्त तक तापमान वृद्धि को फिर 1.5°C से नीचे ला सकते हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तापमान 1.5°C से जितना सम्भव हो, उतना कम और कम समय के लिए ही ऊपर रहे।’

इसके लिए महत्वाकाँक्षाएँ बढ़ानी होंगी – जीवाश्म ईंधनों को चरणबद्ध ढंग से समाप्त करने और नवीकरणीय ऊर्जा की रफ़्तार तेज़ करने, मीथेन प्रदूषण में भारी कटौती करने तथा भूमि, वनों व महासागरों की रक्षा करने की ज़रूरत होगी।

उन्होंने कहा कि सरकारों को राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं और नैट-ज़ीरो उत्सर्जन प्रतिबद्धताओं से भी आगे बढ़कर काम करना होगा। विकसित देशों को अनुकूलन वित्त तीन गुना करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि यह सहायता सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों तक पहुँचे।

महासचिव ने कहा, “विज्ञान स्पष्ट है. समाधान हमारे पास हैं और दुनिया उन्हें लागू करने के लिए पहले से कहीं बेहतर स्थिति में है। अब महत्वाकाँक्षा बढ़ाने और कार्रवाई तेज़ करने का समय है।’

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