जिन देशों में कम उम्र की महिलाओं की आबादी ज्यादा है वहां महिलाओं के पास सबसे कम अधिकार हैं: विश्व बैंक

विश्व बैंक की रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनिया के 190 देशों में से 25 प्रतिशत यानी करीब 47 देश समानता का अधिकार देने में सबसे पीछे हैं। इन देशों की संसद में महिलाओं की भागीदारी केवल 16 प्रतिशत है। यहां की केवल 27 प्रतिशत महिलाओं की ही बिजनेस के मालिकाना हक में हिस्सेदारी है।

दुनिया की 96 प्रतिशत महिलाएं उन देशों में रहती हैं जहां उन्हें पुरुषों के बराबर अधिकार नहीं मिलता। दूसरे शब्दों में कहें तो दुनियभर में केवल 4 प्रतिशत महिलाएं ही समान कानूनी अधिकारों वाले देशों में निवास करती हैं। यह जानकारी साझा की है विश्व बैंक ने।

एक निगाह भारत के कॉर्पोरेट जगत पर डालें तो इससे जुड़े आंकड़े भी अफसोसनाक हैं। देश में टॉप 500 कंपनियों में केवल 9 महिला सीईओ हैं। यह जानकारी उस समय सामने आई जब सयानी घोष ने संसद में सवाल उठाया।

इन दिनों संसद का मानसून सत्र चल रहा है। तृणमूल कांग्रेस की बागी सांसद सयानी घोष ने हाल ही में यहां कॉर्पोरेट जगत में महिलाओं की भागीदारी पर सवाल उठाए।
500 लिस्टेड कंपनियों में कितनी महिलाएं अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में काम कर रहीं हैं?
इनमें कितनी महिलाएं सीईओ, प्रबंध निदेशक, कार्यकारी निदेशक, स्वतंत्र निदेशक और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ), मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) हैं?
प्रोत्साहन के लिए क्या नीतियां हैं?

इन सवालों के जवाब कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने दिए। उन्होंने बताया है कि कारोबार के अनुसार अलग-अलग कैटेगरी वाली इन टॉप 500 कंपनियों में 67 महिला कार्यकारी निदेशक (पूर्णकालिक) हैं, जबकि 22 महिला मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) के पद पर तैनात हैं।

ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट बताती है कि देश की शीर्ष 500 लिस्टेड कंपनियों में बड़े पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी काफी कम है। इन कंपनियों में तैनात केवल 25 महिलाएं ही ऐसी हैं जो प्रबंध निदेशक (MD) हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में कुल मिलाकर 21.39 लाख कंपनियां और 5.06 लाख एलएलपी (अवैध स्वामित्व वाली फर्में) काम कर रहीं हैं। पिछले करीब 10 साल में देशभर में कुल 15.48 लाख कंपनियां रजिस्टर्ड हुईं हैं। इन कंपनियों में तैनात कुल 39.99 लाख निदेशकों में से 11.60 लाख महिला निदेशक (डायरेक्टर) हैं।

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय का डेटा बताता है कि देशभर की सक्रिय कंपनियों में कुल 39 लाख 99 हजार 656 डायरेक्टर हैं। इनमें महिलाओं की संख्या 11 लाख 60 हजार 933 है। इन कंपनियों में महिला डायरेक्टरों की यह संख्या करीब 29 प्रतिशत है।

विश्व बैंक के डेटा से मिली जानकारी के मुताबिक़, जिन देशों में कम उम्र की महिलाओं की आबादी ज्यादा है, वहां महिलाओं के पास सबसे कम अधिकार हैं। दक्षिण एशिया में 15-64 वर्ष की कामकाजी महिलाओं की आबादी 66 प्रतिशत है। इसके बावजूद वहां कानूनी समानता का स्कोर केवल 44.26 है।

मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के देशों में ऐसी कामकाजी महिलाओं की संख्या 64% है। जबकि यहां कानूनी समानता का स्कोर मात्र 43.24 है। उच्च आय वाले देशों में कानूनी समानता का स्कोर 87.93 है। यह सबसे अधिक है। यहां कामकाजी महिलाओं की आबादी 62 प्रतिशत है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनिया के 190 देशों में से 25 प्रतिशत यानी करीब 47 देश समानता का अधिकार देने में सबसे पीछे हैं। इन देशों की संसद में महिलाओं की भागीदारी केवल 16 प्रतिशत है। यहां की केवल 27 प्रतिशत महिलाओं की ही बिजनेस के मालिकाना हक में हिस्सेदारी है।

इसके विपरीत जिन देशों में जेंडर गैप बेहद कम है वहां संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत है। बिजनेस में भी उनकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक हो जाती है। जिन देशों की कानून व्यवस्था सबसे कमजोर है, वहां की केवल 43 प्रतिशत महिलाएं ही कार्यबल का हिस्सा हैं।

विश्व बैंक की विमेन, बिजनेस एंड द लॉ 2026 रिपोर्ट पर एक नज़र डालें तो पता चलता है कि दुनिया के कई देशों ने जेंडर गैप खत्म करने के लिए कई प्रयास किए हैं। साल 2023 से 2025 के बीच 68 देशों ने कानूनों में बदलाव किए। इससे वहां महिलाओं के लिए ज्यादा मौके बढ़े। उनके लिए कमाई करना, बिजनेस चलाना और नौकरी हासिल करना पहले से ज्यादा आसान हो गया। अगले 10 साल में विश्व में 120 करोड़ युवा पढ़ाई पूरी कर नौकरी या बिजनेस में उतरेंगे। इनमें महिलाओं की संख्या करीब 60 करोड़ होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *