अगर नफ़रत को बेक़ाबू छोड़ दिया जाए तो यह सब कुछ बर्बाद कर सकती है, और इसलिए हॉलोकॉस्ट (यहूदी जनसंहार) केवल एक इतिहास भर नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी भी है। अन्तरराष्ट्रीय हॉलोकॉस्ट स्मरण दिवस के अवसर पर 27 जनवरी को संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने यह बात अपने सम्बोधन में कही।

मंगलवार को यूएन महासभागार में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए इस जनसंहार में जीवित बचे व्यक्तियों, और उनके परिजन, पीड़ितों की स्मृति को सम्मानित करने के लिए एकत्र हुए। महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने युद्ध को रेखांकित करते हुए कहा कि हॉलोकॉस्ट के सबक़ को कभी नहीं भुलाया जा सकता है।
दूसरे विश्व युद्ध के समय नात्सियों ने 60 लाख से अधिक यहूदियों और उनके साथ रोमा, सिन्ती समूहों के लोगों का संहार किया था। इस दौरान अन्य अनगिनत पीड़ितों को अभूतपूर्व भयावहता व क्रूरता के दौर से गुज़रना पड़ा था।
आज से 81 वर्ष पहले आउशवित्ज़-बर्केनाउ यातना व जनसंहार शिविर को आज़ाद कराए जाने की याद में हर वर्ष 27 जनवरी को यह स्मरण दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर यूएन प्रमुख ने कहा कि इस विभीषिका के पीड़ितों को सम्मान के लिए हमें न्याय, करुणा व सतर्कता का संकल्प लेना होगा और दमन के विरुद्ध मानवता के पक्ष में एकजुट खड़े रहना होगा। गौरतलब है कि ये इतिहास की क्रूरतम घटनाओं में से है जब इन यातना शिविरों में 10 लाख से अधिक लोगों की हत्या कर दी गई थी।
इस आयोजन में रोमा व सिन्ती समुदायों, विकलांग जन, एलजीबीटीक्यूआई+ व्यक्तियों और उन सभी को याद किया गया, जिन्होंने नात्सी शासन के दौरान व्यवस्थागत ढंग से हिंसा, यातना, और जनसंहार का सामना किया। महासभा प्रमुख ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र, उसके चार्टर, मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा, इन सभी के मूल में यह वचन दोहराया गया है कि इस विभीषिका को फिर कभी नहीं दोहराया जाएगा।
“हमारा कर्तव्य है कि जब कभी अमानवीयकरण किए जाने के संकेत दिखाई दें, तो हम पहले से कहीं अधिक बुलन्द होकर अपनी आवाज़ उठाएं।” उन्होंने हॉलोकॉस्ट में जीवित बचे सिमोन विज़ेनथॉल का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि अच्छे लोग कुछ नहीं करें, तो बस यही स्तिति, दुष्टता के फलने-फूलने की वजह बन जाती है।














